बिलासपुर। तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मानव जीवन के कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, लेकिन यह मानव बुद्धि, संवेदनशीलता और नैतिक मूल्यों का स्थान नहीं ले सकता। यह बात छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमेन डेका ने डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय, बिलासपुर एवं आईसेक्ट इंडिया ग्रुप के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय समर्थ भारत कॉन्क्लेव 2026 के उद्घाटन समारोह में कही।
मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि आज दुनिया तेजी से तकनीकी बदलावों के दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में तकनीक का उपयोग मानव कल्याण, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अन्य उभरती तकनीकों का उपयोग नवाचार, शोध और समाजहित के कार्यों के लिए करें।
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राज्यपाल ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता चिकित्सा, कृषि, शिक्षा, अर्थव्यवस्था और प्रशासन सहित अनेक क्षेत्रों में उपयोगी साबित हो रही है। हालांकि, तकनीक को केवल एक सहायक के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि मानव क्षमताओं के विकल्प के रूप में। उन्होंने इंटरनेट और डिजिटल माध्यमों के बढ़ते उपयोग पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि डिजिटल एडिक्शन जैसी चुनौतियों से बचने के लिए जागरूकता आवश्यक है।
अपने संबोधन में श्री डेका ने कहा कि मानव सभ्यता का विकास हमेशा नवाचार और वैज्ञानिक खोजों के माध्यम से हुआ है। जिस प्रकार अग्नि की खोज ने मानव जीवन में क्रांतिकारी बदलाव लाया, उसी प्रकार आधुनिक तकनीक और विज्ञान भविष्य के भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में आधुनिक तकनीकों के अधिक उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया।
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राज्यपाल ने कहा कि स्टार्टअप और नवाचार केवल आर्थिक विकास के साधन नहीं हैं, बल्कि समाज की समस्याओं के समाधान का प्रभावी माध्यम भी हैं। नवाचार के जरिए दिव्यांगजनों के जीवन को सरल बनाया जा सकता है और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को भी अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए नवीकरणीय ऊर्जा, सौर ऊर्जा, जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन जैसी पहलों को अपनाने का आह्वान किया।
छत्तीसगढ़ की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि राज्य समृद्ध आदिवासी संस्कृति और प्रतिभाशाली युवाओं से भरपूर है। जरूरत इस बात की है कि युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास और आधुनिक अवसरों से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि भारत के गांवों तक तकनीक और नवाचार का लाभ पहुंचाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
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कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में एआई आधारित पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं। सरकार युवाओं को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने के लिए तकनीकी शिक्षा में लगातार सुधार कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि युवा नौकरी मांगने वाले नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले बनें।
कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल रमेन डेका ने एआई कौशल रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह अत्याधुनिक मोबाइल लैब प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर विद्यार्थियों, शिक्षकों और आम नागरिकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा जेनरेटिव एआई की जानकारी देगी। विशेष रूप से ग्रामीण युवाओं को निशुल्क व्यवहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे वे आधुनिक तकनीक से जुड़ सकें।
इस अवसर पर राज्यपाल ने आईसेक्ट के वार्षिक प्रतिवेदन तथा कौशल रथ एवं एआई आधारित पुस्तक का विमोचन भी किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रदीप कुमार घोष, पद्मश्री अजय मांडवी, शिक्षाविद, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, बैंकिंग क्षेत्र के अधिकारी, ग्रामीण उद्यमी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
