रायपुर। राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के घोलेंग ग्राम पंचायत स्थित आजीविका परिसर में पारंपरिक हाथकरघा कला, स्थानीय संस्कृति और महिला सशक्तिकरण का अनूठा संगम देखने को मिला। स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में उत्साहपूर्वक कार्यक्रम में भाग लिया और हाथकरघा एवं बांस से निर्मित उत्पादों की आकर्षक प्रदर्शनी लगाकर स्थानीय कला और शिल्प को नई पहचान दी।
35 से 40 परिवारों की महिलाओं ने दिखाई पारंपरिक कला की झलक
राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस के आयोजन में हाथकरघा आधारित आजीविका से जुड़े 35 से 40 परिवारों की महिलाओं ने भाग लिया। उन्होंने हाथकरघा से तैयार शॉल, पारंपरिक आभूषण तथा बांस से निर्मित उपयोगी और आकर्षक उत्पादों का प्रदर्शन किया।

इस प्रदर्शनी ने जशपुर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, स्थानीय शिल्प और ग्रामीण महिलाओं के कौशल को एक मंच प्रदान किया। आयोजन ने यह संदेश भी दिया कि हाथकरघा केवल परंपरा का प्रतीक नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों की स्थायी आजीविका और आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत माध्यम भी है।
आधुनिक तकनीक से मजबूत होगा हाथकरघा क्षेत्र
जिला प्रशासन द्वारा घोलेंग आजीविका परिसर में हैंडलूम प्रशिक्षण एवं उत्पादन केंद्र का निर्माण कराया जा रहा है। इस केंद्र के माध्यम से हाथकरघा क्षेत्र से जुड़े परिवारों को आधुनिक मशीनरी, तकनीकी सुविधाएं और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन की दिशा में सहयोग मिलेगा।
इसके साथ ही लैब टेस्टिंग, आधुनिक डिजाइन और बेहतर विपणन व्यवस्था विकसित करने पर भी काम किया जा रहा है, ताकि जशपुर की पारंपरिक हाथकरघा कला को आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुरूप नई पहचान मिल सके।
प्रशिक्षण से बाजार तक मिलेगा पूरा सहयोग
आदित्य बिरला समूह के सहयोग से प्रशिक्षण, उत्पादन, डिजाइन विकास और विपणन व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा रहा है। इसका उद्देश्य स्थानीय महिलाओं और कारीगरों के पारंपरिक कौशल को आधुनिक तकनीकों से जोड़कर उनके उत्पादों को व्यापक बाजार तक पहुंचाना है।
प्रदर्शनी में प्रदर्शित हाथकरघा एवं बांस उत्पादों में स्थानीय परंपरा और आधुनिक उपयोगिता का सुंदर समन्वय देखने को मिला, जिसने आगंतुकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।
महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
कार्यक्रम में बिहान के जिला दल के अधिकारी, डीएमएम, डीपीएम, आदित्य बिरला समूह के परिसर प्रमुख एवं प्रशिक्षक सहित स्व-सहायता समूहों से जुड़ी बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित रहीं।
इस अवसर पर महिलाओं ने पारंपरिक हाथकरघा कला को संरक्षित करने, स्थानीय शिल्प को नई पहचान दिलाने और आधुनिक बाजार से जोड़कर इसे आय का मजबूत स्रोत बनाने का संकल्प लिया।
रोजगार और आय के नए अवसर खोल रहा हाथकरघा क्षेत्र
राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम जशपुर की सांस्कृतिक विरासत, स्थानीय हुनर और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ। प्रशिक्षण, आधुनिक उत्पादन तकनीक, डिजाइन विकास और बेहतर बाजार व्यवस्था के माध्यम से आने वाले समय में जशपुर का पारंपरिक हाथकरघा क्षेत्र स्थानीय परिवारों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर सृजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
