रायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने पिछले ढाई वर्षों में श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए श्रमिक कल्याण के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। श्रम एवं उद्योग मंत्री श्री लखनलाल देवांगन के मार्गदर्शन में श्रम विभाग ने तकनीकी नवाचार, पारदर्शिता और सुशासन के माध्यम से श्रमिकों तक योजनाओं का लाभ तेजी से पहुंचाते हुए राज्य को श्रमिक कल्याण के क्षेत्र में नई पहचान दिलाई है।
श्रमिकों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में हुआ सुधार
राज्य सरकार द्वारा संगठित, असंगठित और निर्माण श्रमिकों के हितों की सुरक्षा के लिए विभिन्न श्रम कल्याण मंडलों के माध्यम से 67 कल्याणकारी योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। इन योजनाओं से श्रमिकों और उनके परिवारों की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है।

श्रमिकों के पंजीयन, आवेदन और योजनाओं का लाभ आसान बनाने के लिए श्रम विभाग ने यूजर-फ्रेंडली वेबसाइट और ‘श्रमेव जयते’ मोबाइल ऐप विकसित किया है। इसके माध्यम से श्रमिक अब ऑनलाइन पंजीयन, आवेदन और अन्य सेवाओं का लाभ आसानी से प्राप्त कर रहे हैं।
हर जिले में श्रम कार्यालय, रोजगार और श्रमिक अधिकार दोनों मजबूत
ढाई वर्षों में प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करते हुए राज्य के 5 नए जिलों—मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, सारंगढ़-बिलाईगढ़, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर और सक्ती में श्रम अधिकारी कार्यालय स्थापित करने के लिए 20 नए पदों का सृजन किया गया।
वर्तमान में राज्य के 10 जिलों में सहायक श्रमायुक्त कार्यालय तथा 23 जिलों में श्रम पदाधिकारी कार्यालय संचालित हैं। इस प्रकार अब प्रदेश के सभी 33 जिलों में श्रम विभाग की सेवाएं उपलब्ध हैं।
इसके साथ ही श्रम कानूनों में महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं। दुकानों एवं स्थापना अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन, फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट, महिला श्रमिकों के लिए रात्रिकालीन कार्य की सुविधा तथा फैक्ट्री लाइसेंस की अवधि बढ़ाने जैसे फैसलों से रोजगार के अवसर बढ़े हैं और श्रमिक अधिकार भी मजबूत हुए हैं।
17.82 लाख श्रमिकों को मिला योजनाओं का लाभ
1 जनवरी 2024 से 30 जून 2026 के बीच राज्य में 12.65 लाख नए श्रमिकों का पंजीयन किया गया। इसी अवधि में 17.82 लाख श्रमिकों को विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिया गया, जिन पर 800 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए।
निर्माण श्रमिकों को लगभग 780 करोड़ रुपये, जबकि असंगठित श्रमिकों को करीब 187 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई। लाभ वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) प्रणाली लागू की गई है।
24×7 मुख्यमंत्री श्रमिक सहायता केंद्र से मिल रही त्वरित सहायता
राज्य सरकार द्वारा स्थापित मुख्यमंत्री श्रमिक सहायता केंद्र सप्ताह के सातों दिन, 24 घंटे संचालित किया जा रहा है। इसके साथ ही प्रदेशभर में मोबाइल शिविर लगाकर लाखों श्रमिकों के पंजीयन, नवीनीकरण और आवेदन संबंधी समस्याओं का समाधान किया गया है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों के श्रमिकों को भी सरकारी सेवाओं का लाभ आसानी से मिल रहा है।
आवास, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा को मिला विस्तार
मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता योजना के तहत आवास सहायता राशि बढ़ाकर 1.50 लाख रुपये कर दी गई है। इसके अलावा मृत्यु सहायता, दिव्यांग सहायता, छात्रवृत्ति और श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए शिक्षा सहायता जैसी योजनाओं के माध्यम से हजारों परिवारों को आर्थिक संबल मिला है।
1.60 लाख से अधिक महिला श्रमिकों को मातृत्व सहायता
महिला श्रमिकों के सम्मान और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए मिनीमाता महतारी जतन योजना के तहत निर्माण एवं असंगठित क्षेत्र की 1.60 लाख से अधिक महिला श्रमिकों को मातृत्व सहायता प्रदान की गई है।
वहीं शहीद वीरनारायण सिंह श्रम अन्न योजना के तहत पंजीकृत श्रमिकों को मात्र 5 रुपये में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। श्रमिकों के बच्चों के लिए मेधावी शिक्षा सहायता, निःशुल्क प्रतियोगी परीक्षा कोचिंग और छात्रवृत्ति योजनाओं का भी प्रभावी संचालन किया जा रहा है।
श्रमिक कल्याण में छत्तीसगढ़ बना नई पहचान
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने श्रमिक कल्याण को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का संकल्प लिया है, जिसे श्रम एवं उद्योग मंत्री श्री लखनलाल देवांगन के नेतृत्व में श्रम विभाग प्रभावी रूप से धरातल पर उतार रहा है।
पारदर्शी व्यवस्था, तकनीकी नवाचार, त्वरित सेवाएं, सामाजिक सुरक्षा और श्रमिक सम्मान की भावना के साथ छत्तीसगढ़ आज श्रमिक कल्याण के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है। ढाई वर्षों की यह उपलब्धि केवल योजनाओं और आंकड़ों तक सीमित नहीं, बल्कि लाखों श्रमिक परिवारों के जीवन में विश्वास, सुरक्षा और समृद्धि की नई शुरुआत का प्रतीक है।
