बलरामपुर/कुसमी। ग्राम पंचायत जमीरापाठ में CMDC द्वारा प्रस्तावित बॉक्साइट उत्खनन परियोजना को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और बेरोजगार युवाओं ने रोजगार में प्राथमिकता की मांग उठाई है। ग्रामीणों ने कुसमी के अनुविभागीय अधिकारी (SDM) को आवेदन सौंपकर परियोजना में स्थानीय लोगों को रोजगार देने और प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में उत्खनन कार्य शुरू होने के साथ ही कथित तौर पर बाहर से मजदूर, मुंशी और मैनेजर लाकर काम कराया जा रहा है, जबकि स्थानीय युवा रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं। इससे ग्रामीणों में नाराजगी है।
“हमारे क्षेत्र में काम, तो रोजगार में भी मिले प्राथमिकता”
ग्रामीणों का कहना है कि जिस क्षेत्र की जमीन और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग परियोजना के लिए किया जा रहा है, वहां के स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसरों में प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
उनका कहना है कि क्षेत्र के कई युवा रोजगार के लिए दूसरे शहरों और राज्यों में पलायन करने को मजबूर हैं। ऐसे में गांव में शुरू होने वाली बॉक्साइट परियोजना स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार का बड़ा अवसर बन सकती है।
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे विकास और उत्खनन कार्य के विरोध में नहीं हैं। उनकी मांग है कि परियोजना से होने वाले विकास और रोजगार का लाभ सबसे पहले प्रभावित एवं आसपास के ग्रामीण परिवारों को मिले।

प्रशासन के सामने रखीं प्रमुख मांगें
ग्रामीणों ने प्रशासन से स्थानीय युवाओं और मजदूरों को रोजगार में प्राथमिकता देने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने—
- बाहर से लाए गए कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया की जांच,
- स्थानीय बेरोजगार युवाओं की सूची तैयार कर योग्यता के अनुसार रोजगार,
- कंपनी और ग्रामीणों के बीच प्रशासन की मौजूदगी में बैठक,
- परियोजना से प्रभावित लोगों के हितों की सुरक्षा,
- भर्ती और मजदूरी से जुड़ी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता
सुनिश्चित करने की मांग की है।
रोजगार को बताया युवाओं के भविष्य का सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ रोजगार का मुद्दा नहीं, बल्कि स्थानीय युवाओं के भविष्य, सम्मान और अधिकारों से जुड़ा विषय है। उन्होंने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए कंपनी और ग्रामीणों के बीच समन्वय स्थापित करने तथा स्थानीय लोगों को रोजगार में प्राथमिकता दिलाने के लिए आवश्यक पहल करने की मांग की है।
