बस्तर, 3 अक्टूबर 2026
बस्तर संभाग के दिव्यांगजनों को उनकी जरूरत के अनुसार कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण उपलब्ध कराने के लिए जगदलपुर और दंतेवाड़ा में बड़े स्तर पर शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में विशेष रूप से नक्सल हिंसा और आईईडी विस्फोटों से प्रभावित दिव्यांगजनों के पुनर्वास पर जोर दिया जाएगा। उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से तैयारियों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को सभी व्यवस्थाएं समयबद्ध और प्रभावी ढंग से पूरी करने के निर्देश दिए।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि क्षेत्र का कोई भी पात्र दिव्यांगजन सहायता से वंचित न रहे, इसके लिए ग्राम पंचायतों और ग्राम सभाओं के माध्यम से हितग्राहियों की अंतिम सूची तैयार की जाए। आईईडी विस्फोटों से प्रभावित दिव्यांगजनों का विवरण अलग से दर्ज करने के निर्देश भी दिए गए हैं। शिविरों में कृत्रिम अंग, ट्राईसाइकिल, व्हीलचेयर, कैलिपर्स और श्रवण यंत्र सहित जरूरत के अनुसार विभिन्न सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे।
जिन पात्र हितग्राहियों के पास दिव्यांगता प्रमाण पत्र नहीं है, उनके लिए शिविर स्थल पर ही स्वास्थ्य और समाज कल्याण विभाग के माध्यम से प्रमाणीकरण की सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इससे उपकरण प्राप्त करने की प्रक्रिया में अनावश्यक परेशानी नहीं होगी।
जगदलपुर में पहला तीन दिवसीय शिविर 5 से 7 अक्टूबर तक क्रीड़ा परिसर में आयोजित होगा। 5 अक्टूबर को बस्तर, 6 अक्टूबर को नारायणपुर और कोण्डागांव तथा 7 अक्टूबर को कांकेर जिले के चयनित हितग्राही इसमें शामिल होंगे। इस शिविर के लिए कुल 2,953 हितग्राहियों को चिह्नित किया गया है।
इसके बाद 15 से 17 अक्टूबर तक दंतेवाड़ा के पुलिस लाइन परिसर में शिविर लगाया जाएगा। यहां दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर जिलों के 846 हितग्राहियों को कृत्रिम अंग, कैलिपर्स और अन्य सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। दोनों शिविरों में कार्यक्रम प्रतिदिन सुबह 8 बजे से शुरू होगा।
कमिश्नर श्री डोमन सिंह ने बैठक में शिविरों की प्रशासनिक कार्ययोजना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हितग्राहियों के लिए संबंधित जिला प्रशासन की ओर से निःशुल्क परिवहन और भोजन की व्यवस्था की जाएगी। लाभार्थियों को पहचान के लिए आधार कार्ड की प्रति जैसे पहचान प्रमाण और दो पासपोर्ट आकार के फोटो साथ लाने होंगे।
जयपुर से आने वाली विशेषज्ञ तकनीकी टीम शिविर में नए उपकरण उपलब्ध कराने के साथ पुराने कृत्रिम अंगों की मरम्मत भी करेगी। शिविर स्थल पर छाया, शुद्ध पेयजल, शौचालय, बिजली, प्राथमिक स्वास्थ्य जांच और सुरक्षा की व्यवस्था भी की जाएगी। बीपी और शुगर जैसी प्राथमिक जांच की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए जिला पंचायत सीईओ और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को नोडल जिम्मेदारी दी गई है।
शिविरों की जानकारी दूर-दराज के जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने के लिए प्रेस वार्ता, सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए गए हैं। दिव्यांगजनों की सहायता के लिए स्काउट-गाइड स्वयंसेवकों की भी तैनाती की जाएगी।
उप मुख्यमंत्री ने भविष्य की कार्ययोजना के तहत ग्राम सभाओं के माध्यम से गांवों में सुरक्षा का सत्यापन कर उन्हें ‘आईईडी-मुक्त ग्राम’ घोषित करने की दिशा में भी तेजी से कार्य करने पर जोर दिया। इस अवसर पर पुलिस महानिरीक्षक, संभाग के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, जिला पंचायत सीईओ और स्वास्थ्य एवं नगरीय निकाय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
