रायपुर, 26 जून 2026। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) और जल निधि परियोजना के समन्वय से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिल रही है। मनरेगा के तहत निर्मित डबरियों को वैज्ञानिक मत्स्य पालन और बागवानी से जोड़कर किसानों के लिए अतिरिक्त आय का स्थायी स्रोत तैयार किया जा रहा है। इस अभिनव मॉडल का जायजा लेने के लिए कलेक्टर ने नगरी विकासखंड के बोथापारा और चनागांव का दौरा कर हितग्राहियों से संवाद किया तथा इसे ग्रामीण आजीविका का प्रभावी मॉडल बताया।
16 गांवों में सफल मॉडल, अब 50 गांवों तक विस्तार की तैयारी
धमतरी जिले में वर्तमान में 16 गांवों में आजीविका डबरी मॉडल सफलतापूर्वक संचालित किया जा रहा है। इसकी सफलता को देखते हुए जिला प्रशासन ने अगले चरण में 50 गांवों की 50 आजीविका डबरियों तक इस योजना का विस्तार करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
यह भी पढ़ें: श्रमिकों के बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाएगी सरकार, 3 जुलाई तक करें आवेदन ……….. आगे पढ़ें
कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मनरेगा के तहत निर्मित प्रत्येक सार्वजनिक एवं निजी परिसंपत्ति का उत्पादक उपयोग सुनिश्चित किया जाए, ताकि ग्रामीण परिवारों को दीर्घकालिक आय का स्थायी साधन उपलब्ध हो सके।
₹33 हजार की डबरी से वैज्ञानिक मत्स्य पालन को बढ़ावा
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने बताया कि प्रत्येक 20×20×3 मीटर आकार की आजीविका डबरी का निर्माण लगभग ₹33 हजार की लागत से किया जा रहा है। इन डबरियों में वैज्ञानिक पद्धति से मत्स्य पालन कर किसान कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं।
यह मॉडल जल संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीणों के लिए अतिरिक्त आय का नया स्रोत बन रहा है और पारंपरिक खेती पर निर्भरता को भी कम कर रहा है।
यह भी पढ़ें: ₹8.63 करोड़ के सड़क और पुल निर्माण कार्यों की सौगात, कई विकास……….. आगे पढ़ें
एबिस कंपनी की साझेदारी से 25% तक घटेगी इनपुट लागत
इस योजना को आर्थिक रूप से और अधिक मजबूत बनाने के लिए जिला प्रशासन ने एबिस कंपनी के साथ कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत साझेदारी की है।
इसके अंतर्गत मत्स्य पालकों को मछली आहार (फीड) की खरीद पर 25 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है। इससे किसानों की उत्पादन लागत कम हो रही है और उनका शुद्ध लाभ बढ़ने की संभावना मजबूत हुई है।
यह भी पढ़ें:मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 का असर: मात्र 2 घंटे में दोबारा सक्रिय हुआ……….. आगे पढ़ें
महिला सशक्तिकरण की मिसाल बनीं सावित्री दर्रो
नगरी विकासखंड के ग्राम बोथापारा की महिला मत्स्य पालक श्रीमती सावित्री दर्रो ने अपने लगभग 7 एकड़ कृषि क्षेत्र में दो आजीविका डबरियां विकसित की हैं। पहले वे केवल धान की खेती करती थीं, लेकिन अब इन डबरियों में कतला, रोहू और मृगल प्रजाति की मछलियों का पालन कर अतिरिक्त आय अर्जित कर रही हैं।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने बताया कि उनके पुत्र ओमप्रकाश को आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों का प्रशिक्षण लेने के लिए अगले महीने पुरी (ओडिशा) भेजा जाएगा। प्रशिक्षण के बाद वे अपने परिवार के साथ-साथ क्षेत्र के अन्य युवाओं को भी आधुनिक मत्स्य पालन की तकनीकों का प्रशिक्षण देंगे।
डबरी के साथ बागवानी से बढ़ रही किसानों की आय
कलेक्टर ने चनागांव के प्रगतिशील किसान श्री नारायण सिंह नेताम के खेत का भी निरीक्षण किया। उन्होंने अपनी 5 एकड़ कृषि भूमि में दो आजीविका डबरियां विकसित की हैं और डबरी के पानी का उपयोग मत्स्य पालन के साथ-साथ आम की बागवानी के लिए भी कर रहे हैं।
डबरी के पोषक तत्वों से युक्त पानी के कारण बागवानी में भी बेहतर उत्पादन मिल रहा है, जिससे उन्हें वर्षभर नियमित आय प्राप्त हो रही है। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने डबरी के पानी की गुणवत्ता का भी परीक्षण कराया।
मनरेगा, जल संरक्षण और मत्स्य पालन का समन्वय बनेगा ग्रामीण विकास का आधार
कलेक्टर ने कहा कि मनरेगा का उद्देश्य केवल अस्थायी रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि ऐसी परिसंपत्तियों का निर्माण करना है, जो ग्रामीण परिवारों के लिए दीर्घकालिक आजीविका का साधन बनें।
उन्होंने कहा कि मनरेगा, जल संरक्षण और वैज्ञानिक मत्स्य पालन का यह समन्वित मॉडल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, पोषण सुरक्षा बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
