रायपुर, 26 जून 2026। शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं ग्रामीणों को स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इसका प्रेरणादायक उदाहरण बीजापुर जिले के भोपालपटनम विकासखंड के ग्राम उल्लूर निवासी सदाशिव कुरगुड़ हैं। उन्होंने पशुधन विकास विभाग की किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना के तहत ₹30 हजार का ऋण प्राप्त कर मुर्गी पालन व्यवसाय शुरू किया और आज इस व्यवसाय से प्रतिवर्ष लगभग ₹80 हजार का शुद्ध लाभ अर्जित कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहे हैं।
₹30 हजार के ऋण से मिला स्वरोजगार का अवसर
सदाशिव कुरगुड़ खेती के साथ अतिरिक्त आय का स्रोत विकसित करना चाहते थे, लेकिन आर्थिक संसाधनों की कमी उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती थी। इसी दौरान उन्हें पशुधन विकास विभाग की किसान क्रेडिट कार्ड योजना की जानकारी मिली।
विभाग के मार्गदर्शन से उन्हें बैंक के माध्यम से ₹30 हजार का ऋण प्राप्त हुआ। इस राशि से उन्होंने मुर्गी पालन के लिए चूजों की खरीद की तथा उनके पालन-पोषण के लिए आवश्यक आहार एवं अन्य व्यवस्थाएं सुनिश्चित कीं।

तकनीकी मार्गदर्शन से व्यवसाय बना लाभ का जरिया
पशुधन विकास विभाग द्वारा दिए गए तकनीकी मार्गदर्शन, नियमित निगरानी और वैज्ञानिक प्रबंधन के कारण सदाशिव का मुर्गी पालन व्यवसाय लगातार सफल होता गया।
वर्तमान में वे इस व्यवसाय से प्रतिवर्ष लगभग ₹1 लाख की आय अर्जित कर रहे हैं, जिसमें करीब ₹80 हजार का शुद्ध लाभ प्राप्त हो रहा है। इस अतिरिक्त आय से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है और वे आत्मनिर्भर जीवन की ओर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
अब आधुनिक पोल्ट्री फार्म स्थापित करने का लक्ष्य
सदाशिव कुरगुड़ का कहना है कि पशुधन विकास विभाग की योजना ने उन्हें केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और स्वरोजगार का अवसर भी प्रदान किया है।
अब उनका लक्ष्य भविष्य में एक आधुनिक व्यावसायिक पोल्ट्री फार्म स्थापित कर अपने व्यवसाय का विस्तार करना और रोजगार के नए अवसर सृजित करना है।
सरकारी योजनाएं बदल रही हैं ग्रामीणों की जिंदगी
सदाशिव ने पशुधन विकास विभाग और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यदि अधिक से अधिक किसान और ग्रामीण युवा विभागीय योजनाओं का लाभ उठाएं, तो वे भी स्वरोजगार अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत बना सकते हैं।
पशुधन विकास विभाग की विभिन्न योजनाएं जिले में किसानों और ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने, उनकी आय बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनाने में प्रभावी भूमिका निभा रही हैं। सदाशिव कुरगुड़ की सफलता इस बात का प्रमाण है कि सरकारी योजनाओं, सही मार्गदर्शन और मेहनत के समन्वय से ग्रामीण परिवार आर्थिक रूप से सशक्त बन सकते हैं।
