धमतरी।
छत्तीसगढ़ में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए औषधीय पौधों की खेती को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। वन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा धमतरी जिले के ग्राम राउतमुड़ा में “सजीव वच विदोहन प्रशिक्षण” का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में धमतरी और नारायणपुर जिले के लगभग 50 किसानों ने भाग लेकर औषधीय खेती की आधुनिक तकनीकों की जानकारी प्राप्त की।
वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि राज्य सरकार किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ ऐसे वैकल्पिक कृषि मॉडल उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयासरत है, जिनसे कम लागत में अधिक मुनाफा प्राप्त किया जा सके। उन्होंने कहा कि औषधीय पौधों की खेती केवल किसानों की आय बढ़ाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह वन आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित करने का प्रभावी साधन भी बन रही है।

उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ की जलवायु और मिट्टी औषधीय पौधों की खेती के लिए अत्यंत अनुकूल है। ऐसे में किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण, विपणन सहायता और वैज्ञानिक खेती की जानकारी उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। आने वाले वर्षों में औषधीय खेती ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती प्रदान करेगी।
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कार्यक्रम में औषधि पादप बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम ने किसानों को पैडी डायवर्सन मॉडल की जानकारी देते हुए बताया कि “वच” की खेती धान का एक लाभकारी विकल्प बनकर सामने आई है। उन्होंने बताया कि एक एकड़ भूमि में वच की खेती करने पर लगभग 20 हजार रुपये की लागत आती है, जबकि एक वर्ष में किसान करीब एक लाख रुपये तक की शुद्ध आय अर्जित कर सकते हैं। इस प्रकार किसानों को पारंपरिक खेती की तुलना में कई गुना अधिक लाभ प्राप्त हो सकता है।
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उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बाजार में औषधीय पौधों की मांग लगातार बढ़ रही है। आयुर्वेदिक औषधियों, हर्बल उत्पादों और स्वास्थ्य संबंधी उद्योगों में वच सहित कई औषधीय पौधों की आवश्यकता बढ़ने से किसानों के लिए यह एक लाभकारी व्यवसाय साबित हो सकता है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान किसानों को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं दी गई, बल्कि खेत में जाकर वच की खेती, जड़ों की खुदाई, सफाई, कटाई, सुखाने और विपणन की पूरी प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया।प्रशिक्षण कार्यक्रम के बाद बोर्ड के पदाधिकारियों ने ग्राम पोतियाडीह का दौरा कर माँ गायत्री स्व-सहायता समूह द्वारा दो एकड़ भूमि में की जा रही “खस” की खेती का निरीक्षण किया। समूह की महिलाओं ने बताया कि आगामी हार्वेस्टिंग के बाद उन्हें लगभग एक लाख रुपये की शुद्ध आय प्राप्त होने की संभावना है।
वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि औषधीय पौधों की खेती महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण स्वावलंबन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम बन रही है। राज्य सरकार किसानों और महिला स्व-सहायता समूहों को आय के नए अवसर उपलब्ध कराने के लिए ऐसे नवाचारों को लगातार प्रोत्साहित कर रही है।
