📍बलौदाबाजार |
छत्तीसगढ़ में वन एवं वन्यजीव संरक्षण को लेकर किए जा रहे प्रयासों के सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगे हैं।
बलौदाबाजार वनमंडल अंतर्गत आयोजित “देवपुर समर कैंप 2026” के दौरान देवपुर जंगल में दुर्लभ “विशाल भारतीय गिलहरी” दिखाई दी, जिसे प्रदेश की समृद्ध जैव विविधता और स्वस्थ वन पारिस्थितिकी का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
16 मई को आयोजित पक्षी अवलोकन भ्रमण के दौरान प्रतिभागियों ने इस दुर्लभ वृक्षवासी गिलहरी को देखा।
इस अनोखे वन्यजीव को देखकर प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीव विशेषज्ञों में खास उत्साह देखने को मिला।वन विभाग के अनुसार किसी भी जंगल में इस प्रजाति की मौजूदगी वहां के घने वृक्ष आवरण, संतुलित पर्यावरण और समृद्ध जैव विविधता का संकेत मानी जाती है।

वन मंत्री केदार कश्यप ने इस दुर्लभ गिलहरी के दिखाई देने को प्रदेश के लिए गर्व का विषय बताया।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के जंगल केवल प्राकृतिक संपदा नहीं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन और वन्यजीव संरक्षण के मजबूत आधार हैं।
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उन्होंने कहा कि राज्य सरकार वन संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन, प्रकृति शिक्षा और ईको-पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लगातार गंभीरता से कार्य कर रही है।विशेषज्ञों के अनुसार “विशाल भारतीय गिलहरी” यानी Ratufa Indica भारत की सबसे बड़ी वृक्षवासी गिलहरियों में शामिल है।इसकी लंबाई पूंछ सहित लगभग 3 फीट तक हो सकती है।
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इस प्रजाति की खास पहचान इसके शरीर पर दिखने वाले गहरे लाल, काले, भूरे और क्रीम रंगों का मिश्रण है।
यह एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक करीब 20 फीट लंबी छलांग लगाने की क्षमता रखती है।वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक जंगलों की कटाई और प्राकृतिक आवासों के लगातार खत्म होने से इस प्रजाति के अस्तित्व पर खतरा बढ़ रहा है।

भारत में यह प्रजाति वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-दो के अंतर्गत संरक्षित है।उन्होंने बताया कि देवपुर समर कैंप के जरिए बच्चों, युवाओं और प्रकृति प्रेमियों को जंगल और वन्यजीवों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
