‘बिरहोर जननायक’ का विमोचन: पद्मश्री Jageshwar Yadav के संघर्ष और सेवा की प्रेरक गाथा आई सामने
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रायपुर, 10 अप्रैल 2026।
छत्तीसगढ़ की सामाजिक चेतना और आदिवासी उत्थान की प्रेरक गाथा को शब्दों में संजोने वाली पुस्तक “बिरहोर जननायक” का आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में विमोचन किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने पुस्तक का लोकार्पण करते हुए इसे सेवा, समर्पण और संघर्ष का जीवंत दस्तावेज बताया।
यह पुस्तक पद्मश्री Jageshwar Yadav के जीवन और उनके सामाजिक कार्यों पर आधारित है, जिन्होंने विशेष रूप से जशपुर जिले के बिरहोर आदिवासी समुदाय के उत्थान के लिए अपना जीवन समर्पित किया। उन्हें ‘बिरहोर के भाई’ के रूप में जाना जाता है—एक ऐसा नाम जो विश्वास, सेवा और संवेदनशीलता का प्रतीक बन चुका है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जागेश्वर यादव का जीवन इस बात का प्रमाण है कि सच्चा नेतृत्व पद या प्रतिष्ठा से नहीं, बल्कि सेवा और समर्पण से जन्म लेता है। उन्होंने कहा कि इस पुस्तक के माध्यम से समाज के उन अनदेखे पहलुओं और संघर्षों को सामने लाया गया है, जो आमतौर पर चर्चा में नहीं आते, लेकिन समाज निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
🌿 आदिवासी उत्थान की प्रेरक कहानी
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि बिरहोर जैसे आदिम जनजाति समुदायों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए जागेश्वर यादव ने जो कार्य किए हैं, वे अत्यंत सराहनीय हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में उनके योगदान ने हजारों लोगों के जीवन को सकारात्मक दिशा दी है।
📘 नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनेगी यह कृति
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि “बिरहोर जननायक” केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि एक प्रेरक यात्रा है, जो युवाओं को समाज के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का संदेश देती है। यह कृति पाठकों को न केवल प्रेरित करेगी, बल्कि उन्हें समाज के लिए कुछ करने की दिशा में भी प्रोत्साहित करेगी।
✍️ लेखक की सोच और उद्देश्य
पुस्तक के लेखक Lokesh Patel ने बताया कि इस पुस्तक की रचना आदिम जनजातियों, विशेष रूप से बिरहोर समुदाय के विकास के लिए किए गए कार्यों से प्रेरित होकर की गई है। उन्होंने कहा कि इसमें जागेश्वर यादव के जीवन संघर्ष, उनके सामाजिक योगदान और उनके मानवीय दृष्टिकोण को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है, ताकि आने वाली पीढ़ी उनसे प्रेरणा ले सके।
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क्यों खास है यह पुस्तक?
- आदिवासी समाज के संघर्ष और विकास की सच्ची कहानी
- सेवा और समर्पण का जीवंत उदाहरण
- युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत
- सामाजिक बदलाव की दिशा में मार्गदर्शक
