कोरिया, 16 अक्टूबर 2026
कोरिया जिले के ग्राम खैरी के डकईपारा निवासी सुशीला कुर्रे खेती और मजदूरी के साथ बकरी पालन कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में जुटी हैं। छत्तीसगढ़ महिला कोष से मिले 40 हजार रुपये के ऋण ने उन्हें आजीविका का नया साधन विकसित करने और परिवार की आय बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर दिया है।
पति मनोज कुमार कुर्रे और परिवार के पांच सदस्यों की जिम्मेदारियों में हाथ बंटाने वाली सुशीला पहले से ही कृषि कार्य और मजदूरी करती थीं। परिवार की आमदनी बढ़ाने के लिए उन्होंने बकरी पालन को अपनाने का फैसला किया। दिसंबर 2025 में महिला कोष से ऋण मिलने के बाद उन्होंने इस राशि का उपयोग बकरी पालन के लिए किया।
वर्तमान में सुशीला के पास सात बकरियां हैं। खेती और मजदूरी की व्यस्तताओं के बीच वे उनकी देखभाल भी करती हैं। मेहनत और लगन के साथ इस काम को आगे बढ़ाते हुए वे परिवार के लिए आय का एक अतिरिक्त स्रोत तैयार कर रही हैं।
सुशीला की कहानी बताती है कि आर्थिक सहयोग और अपनी मेहनत के दम पर ग्रामीण महिलाएं आजीविका के नए रास्ते तलाश सकती हैं। खेती, मजदूरी और पशुपालन को साथ लेकर वे परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने का प्रयास कर रही हैं। छत्तीसगढ़ महिला कोष से मिला ऋण उनके इसी प्रयास में सहायक बना है और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का आधार दे रहा है।
