रायपुर, 27 सितंबर 2026
महासमुंद जिले के तुमगांव निवासी राकेश धीवर के पारंपरिक मछली व्यवसाय को मत्स्य विभाग की मोटर-साइकिल सह आइस बॉक्स योजना से नई गति मिली है। परिवहन और मछलियों को सुरक्षित रखने की सुविधा मिलने के बाद वे आसपास के गांवों के साथ विभिन्न हाट-बाजारों तक आसानी से पहुंच बना पा रहे हैं। व्यवसाय के विस्तार के साथ वर्तमान में वे प्रतिमाह करीब 45 से 50 हजार रुपये की शुद्ध आय अर्जित कर रहे हैं।
राकेश धीवर का परिवार लंबे समय से मछली पालन और मछली विक्रय के व्यवसाय से जुड़ा रहा है। उनके पिता विश्राम धीवर प्राथमिक मत्स्य सहकारी समिति तुमगांव के सदस्य रहे हैं। पिता के इसी व्यवसाय से प्रेरणा लेकर राकेश ने भी मछली पालन और विक्रय को अपनी आजीविका का हिस्सा बनाया। समय के साथ उन्होंने इसे परिवार की आय के एक प्रमुख साधन के रूप में विकसित किया।
मत्स्य विभाग से मोटर-साइकिल सह आइस बॉक्स योजना का लाभ मिलने के बाद उनके कारोबार का दायरा बढ़ा। मोटर-साइकिल के माध्यम से मछलियों को दूर-दराज के गांवों और बाजारों तक ले जाना आसान हुआ, वहीं आइस बॉक्स की सुविधा से मछलियों को सुरक्षित तरीके से परिवहन और बिक्री के लिए ले जाने में मदद मिली। इससे उन्हें नए ग्राहकों तक पहुंच बनाने और अधिक बाजारों में कारोबार करने का अवसर मिला।
राकेश प्रतिदिन आसपास के तालाबों से मछलियां खरीदकर स्थानीय हाट-बाजारों में बेचते हैं। वर्तमान में वे रोजाना लगभग 2 क्विंटल मछली का कारोबार कर रहे हैं। इस कारोबार में प्रतिदिन करीब 20 हजार रुपये की लागत आती है, जबकि बिक्री से लगभग 24 हजार रुपये तक की आय होती है। इस तरह करीब 4 हजार रुपये का सकल लाभ प्राप्त होता है। मजदूरी और अन्य आवश्यक खर्चों के बाद उनकी प्रतिदिन की शुद्ध आय लगभग 1,000 से 1,500 रुपये रहती है।
मछली व्यवसाय अब केवल राकेश की व्यक्तिगत आजीविका तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार के लिए एक संयुक्त उद्यम का रूप ले चुका है। उनकी पत्नी और दो पुत्र भी मछली विक्रय के काम में सक्रिय रूप से सहयोग करते हैं। परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर कारोबार संचालित करने से कामकाज में सुविधा हुई है और परिवार की आर्थिक स्थिति भी पहले की तुलना में मजबूत हुई है।
मछली विक्रय के साथ राकेश अपने पैतृक खेत में कृषि कार्य भी करते हैं। इस तरह उन्होंने कृषि और मत्स्य व्यवसाय को अपनी आजीविका का आधार बनाकर आय के एक से अधिक स्रोत तैयार किए हैं। मोटर-साइकिल सह आइस बॉक्स योजना से मिला सहयोग उनके पारंपरिक व्यवसाय को अधिक व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने में उपयोगी साबित हुआ है।
राकेश धीवर की कहानी बताती है कि जब पारंपरिक आजीविका को आवश्यक संसाधन और सुविधाएं मिलती हैं, तो छोटे स्तर का व्यवसाय भी विस्तार का अवसर हासिल कर सकता है। योजना से मिली परिवहन और भंडारण सुविधा ने उनके मछली व्यवसाय को आसपास के बाजारों तक पहुंचाने में मदद की है, जिससे परिवार के लिए आय का मजबूत आधार तैयार हुआ है।
