रायपुर, 2 सितंबर 2026
जशपुर जिला अस्पताल में गंभीर और आपातकालीन मरीजों के इलाज के लिए विशेषज्ञ सेवाओं के विस्तार का असर अब सामने आने लगा है। चिकित्सकों और नर्सिंग टीम की तत्परता, समय पर लिए गए चिकित्सकीय निर्णय और बेहतर समन्वय से हाल ही में दो गंभीर मरीजों का सफल उपचार किया गया। सेप्टिक शॉक की गंभीर स्थिति में पहुंची 10 वर्षीय बच्ची को उपचार के बाद स्थिर किया गया, वहीं एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के मामले में महिला का सफल ऑपरेशन कर गंभीर जटिलता को टाला गया।
इन मामलों से जिला अस्पताल में गंभीर और आपातकालीन स्थितियों में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं को लेकर तस्वीर बेहतर हुई है। स्थानीय स्तर पर उपचार मिलने से मरीजों और उनके परिजनों को दूरस्थ बड़े अस्पतालों या दूसरे राज्यों की ओर जाने की जरूरत कम पड़ सकती है, जिससे समय और खर्च दोनों की बचत होती है।
गुमला जिले के पाकड़टोली निवासी 10 वर्षीय संध्या कुमारी को 28 अगस्त को तेज बुखार, अत्यधिक कमजोरी, सुस्ती और बेहोशी की गंभीर स्थिति में जिला अस्पताल जशपुर लाया गया था। अस्पताल पहुंचने पर उसका ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर काफी कम था। जांच में किडनी और लिवर फंक्शन में भी गंभीर असामान्यताएं मिलीं। चिकित्सकीय परीक्षण के बाद उसकी स्थिति को सेप्टिक शॉक के रूप में चिन्हित किया गया।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पुष्पराज प्रधान के नेतृत्व में बच्ची का तत्काल उपचार शुरू किया गया। उसे आईवी फ्लूड्स, एंटीबायोटिक्स और आवश्यक सपोर्टिव उपचार दिया गया। लगातार कम रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए करीब तीन दिनों तक आवश्यक वेसोएक्टिव और जीवनरक्षक सपोर्ट दिया गया। उपचार के दौरान चिकित्सकीय एवं नर्सिंग टीम ने उसके ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और चेतना सहित जरूरी स्वास्थ्य मानकों की लगातार निगरानी की।
लगातार उपचार और निगरानी के बाद बच्ची की स्थिति में सुधार हुआ। अस्पताल के अनुसार वर्तमान में वह हेमोडायनामिक रूप से स्थिर, पूरी तरह सचेत और ओरिएंटेड है तथा उसमें कोई डेंजर साइन नहीं है। उसके उपचार में अमृता सिंह, संध्या साविता एक्का, अनुपा मिंज, वसुंधरा साय, प्रमिला भगत, रेशमा किस्पोट्टा, अमीना मिंज और अंकिता मिंज ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इसी तरह कुनकुरी विकासखंड के ग्राम घरमुंडा निवासी चंद्रिका बाई को एक्टोपिक प्रेग्नेंसी की गंभीर स्थिति में जिला अस्पताल लाया गया। जांच में पता चला कि गर्भावस्था गर्भाशय के बजाय फैलोपियन ट्यूब में विकसित हो रही थी। ऐसी स्थिति में समय पर उपचार नहीं मिलने पर फैलोपियन ट्यूब फटने से गंभीर आंतरिक रक्तस्राव का खतरा रहता है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. ममता साय ने तत्काल सर्जिकल उपचार का निर्णय लिया। आवश्यक तैयारियों के बाद महिला का सफल ऑपरेशन किया गया और फैलोपियन ट्यूब में विकसित एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का उपचार किया गया। ऑपरेशन के बाद महिला को चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है और आवश्यक उपचार एवं देखभाल दी जा रही है।
जिला अस्पताल में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने की दिशा में भी काम जारी है। सिविल सर्जन के अनुसार शासन की ओर से आवश्यक डीएफआर की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है, जिससे जरूरत पड़ने पर रात्रिकालीन आपातकालीन सर्जरी की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा सकेगी। इससे गर्भावस्था से जुड़ी आपात स्थितियों के साथ अन्य गंभीर सर्जिकल मामलों में भी मरीजों को समय पर उपचार देने में मदद मिलेगी।
विशेषज्ञ चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के समन्वित प्रयासों से जिला अस्पताल में गंभीर मरीजों को आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था को लगातार मजबूत किया जा रहा है।
