राजनांदगांव, 2 सितंबर 2026
राजनांदगांव जिले के ग्राम बोईरडीह की नन्हीं याक्षी पाल ने कुपोषण से बाहर निकलकर सामान्य पोषण श्रेणी में जगह बनाई है। कुछ समय पहले गंभीर तीव्र कुपोषण से जूझ रही याक्षी का वजन महज 4.9 किलोग्राम और लंबाई 65 सेंटीमीटर दर्ज की गई थी। नियमित निगरानी, पोषण संबंधी मार्गदर्शन और परिवार की सक्रिय सहभागिता से अब उसकी स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
याक्षी के माता-पिता लक्ष्मी पाल और सूर्य प्रकाश पाल दैनिक काम में व्यस्त रहते हैं, इसलिए उसकी देखभाल मुख्य रूप से दादा उमाशंकर और दादी गीता कर रहे थे। प्रारंभिक पोषण मूल्यांकन में गंभीर तीव्र कुपोषण की पहचान होने के बाद याक्षी को सामुदायिक स्तर पर संचालित तीव्र कुपोषण प्रबंधन कार्यक्रम से जोड़ा गया।
कार्यक्रम के तहत याक्षी का नियमित वजन और लंबाई मापी गई और लगातार फॉलोअप किया गया। उसे अतिरिक्त टेक-होम राशन उपलब्ध कराने के साथ परिवार को उसकी उम्र के अनुसार संतुलित और विविध आहार देने, भोजन की मात्रा और अंतराल का ध्यान रखने तथा बेहतर देखभाल के संबंध में समझाइश दी गई। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने परिवार को समय-समय पर जरूरी पोषण संबंधी सलाह भी दी।
परिवार ने भी इस सलाह को गंभीरता से अपनाया और याक्षी के भोजन एवं देखभाल पर विशेष ध्यान दिया। लगातार निगरानी और घर पर बेहतर देखभाल के परिणामस्वरूप उसके स्वास्थ्य में धीरे-धीरे सुधार दर्ज हुआ।
अब याक्षी का वजन बढ़कर 7 किलोग्राम और लंबाई 70 सेंटीमीटर हो गई है। वह गंभीर कुपोषण की स्थिति से बाहर निकलकर सामान्य पोषण श्रेणी में पहुंच चुकी है।
याक्षी की कहानी यह दिखाती है कि कुपोषण की समय पर पहचान के साथ नियमित निगरानी, उचित पोषण परामर्श, पूरक आहार और परिवार की भागीदारी बच्चों के पोषण स्तर में सकारात्मक बदलाव ला सकती है।
