रायपुर, 02 सितंबर 2026
बालोद जिले के वनांचल क्षेत्र में रहने वाले कुम्हार मंशाराम और उनकी पत्नी रामकली के लिए पक्का मकान सिर्फ एक घर नहीं, बल्कि वर्षों की मुश्किलों से राहत और बेहतर जिंदगी की नई शुरुआत है। डौण्डी विकासखंड के ग्राम कुमुड़कट्टा निवासी मंशाराम लंबे समय से कुम्हारी और कृषि मजदूरी के जरिए परिवार का पालन-पोषण करते आ रहे थे। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत मिले सहयोग से अब उनका कच्चा घर पक्के आशियाने में बदल चुका है।
मंशाराम के लिए कुम्हारी सिर्फ पारंपरिक काम नहीं, बल्कि परिवार की आजीविका का प्रमुख जरिया है। तीज-त्योहारों के समय वे मिट्टी की मूर्तियां, खिलौने और बर्तन तैयार करते हैं। लेकिन बारिश के मौसम में कच्चे मकान की सीलन और टपकती छत उनके हुनर पर भी भारी पड़ती थी। पानी से मिट्टी के तैयार उत्पाद खराब हो जाते थे, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था।

उम्र के इस पड़ाव में अपने दम पर पक्का मकान बनाना मंशाराम के लिए आसान नहीं था। प्रधानमंत्री आवास योजना से मिली सहायता और अपनी जमा पूंजी को मिलाकर उन्होंने अब एक मजबूत पक्का मकान तैयार कर लिया है। सुरक्षित छत मिलने के बाद वे मौसम की चिंता किए बिना अपने मिट्टी के उत्पाद तैयार कर पा रहे हैं। इससे उनके पारंपरिक हुनर को जारी रखने के साथ आमदनी बढ़ाने का अवसर भी मिला है।
मंशाराम के परिवार को अन्य सरकारी योजनाओं का भी लाभ मिल रहा है। भूमिहीन होने के कारण उन्हें पंडित दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता मिल रही है। वहीं उनकी पत्नी रामकली को महतारी वंदन योजना के तहत प्रतिमाह आर्थिक सहायता प्राप्त हो रही है।
रामकली का कहना है कि पहले कच्चे मकान में रहकर परिवार को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता था। अब पक्का घर मिलने से न केवल रहने की चिंता दूर हुई है, बल्कि कुम्हारी का काम भी बेहतर तरीके से हो पा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार जताते हुए कहा कि पक्का आवास और महतारी वंदन योजना से उनके परिवार की जिंदगी पहले से आसान हुई है।
सरकारी योजनाओं से मिले इस सहयोग ने मंशाराम के परिवार को सुरक्षित आवास के साथ अपनी पारंपरिक आजीविका को आगे बढ़ाने का अवसर दिया है। अब पक्की छत के नीचे उनका हुनर भी सुरक्षित है और परिवार भविष्य को लेकर पहले से अधिक आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है।
