रायपुर, 21 अगस्त 2026
गांव की पगडंडियों से स्कूल तक पहुंचने वाली बेटियों के लिए शिक्षा का सफर तभी सहज और सुरक्षित हो सकता है, जब विद्यालय में उनकी बुनियादी जरूरतों का भी ध्यान रखा जाए। इसी सोच के साथ छत्तीसगढ़ सरकार ने ‘मेरी बेटी-मेरा अभिमान’ अभियान की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय एवं उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने 6 अगस्त को इस अभियान का शुभारंभ किया। स्वतंत्रता दिवस से गणतंत्र दिवस तक चलने वाला यह अभियान बालिकाओं के सम्मान, सुरक्षा, स्वच्छता और आत्मविश्वास से जुड़ी व्यापक पहल के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है।
अभियान के तहत प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों के 6,671 ऐसे शासकीय विद्यालयों में बालिका शौचालयों का निर्माण किया जाएगा, जहां वर्तमान में यह सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसके लिए ग्राम सभा की आवश्यकता और अनुमोदन को महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है, जिससे निर्माण कार्य स्थानीय जरूरतों और ग्राम स्तर की सहभागिता के अनुरूप किए जा सकें।
जिलों की जरूरत के अनुसार शौचालय निर्माण का लक्ष्य तय किया गया है। कोरबा में 750, रायगढ़ में 666, सरगुजा में 542, सूरजपुर में 500, बीजापुर में 407 और बलरामपुर में 331 बालिका शौचालय प्रस्तावित हैं। प्रदेश के अन्य जिलों में भी आवश्यकता के अनुसार निर्माण कार्य किए जाएंगे।
अभियान के लिए वित्तीय व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है। विकसित भारत जीरामजी योजना के अंतर्गत बालिका शौचालय निर्माण के लिए बजट का प्रावधान किया गया है। प्रत्येक शौचालय की अनुमानित लागत 4.30 लाख रुपये निर्धारित है, जिसमें 1.07 लाख रुपये मजदूरी और 3.23 लाख रुपये सामग्री के लिए निर्धारित हैं। इससे विद्यालयों में जरूरी सुविधा विकसित होने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
विद्यालय में सुरक्षित और स्वच्छ शौचालय का सीधा संबंध छात्राओं की नियमित उपस्थिति और पढ़ाई से है। विशेषकर किशोरावस्था की छात्राओं के लिए निजता, स्वच्छता और सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण होती है। अलग एवं सुरक्षित शौचालय की सुविधा मिलने से छात्राओं को विद्यालय में अधिक सहज वातावरण मिलेगा और वे बिना असुविधा के अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगी।
इस पहल में केवल शौचालय निर्माण तक सीमित रहने के बजाय उसकी गुणवत्ता और उपयोगिता पर भी जोर दिया गया है। प्रस्तावित बालिका शौचालयों में पर्याप्त रोशनी, दिव्यांगजनों के लिए रैंप और रेलिंग तथा फर्श और अंदरूनी दीवारों पर गुणवत्तायुक्त टाइल्स जैसी सुविधाओं का प्रावधान किया गया है। इससे शौचालय सुरक्षित, स्वच्छ, समावेशी और सुविधाजनक बनाए जा सकेंगे।
अभियान को प्रभावी बनाने के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग और स्कूल शिक्षा विभाग के बीच समन्वय किया जा रहा है। विद्यालयों का चयन और निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी स्कूल शिक्षा विभाग की होगी। जिला स्तर पर कलेक्टर के मार्गदर्शन में दोनों विभाग मिलकर कार्य करेंगे। निर्माण पूरा होने के बाद शौचालयों के उपयोग, देखरेख और रखरखाव की जिम्मेदारी भी स्कूल शिक्षा विभाग की होगी।
शौचालय निर्माण के साथ विद्यार्थियों को स्वच्छता और इसके नियमित उपयोग के प्रति जागरूक करने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसके लिए स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण के साथ समन्वय किया जाएगा, ताकि अभियान केवल निर्माण तक सीमित न रहे, बल्कि शौचालयों का नियमित उपयोग, स्वच्छता और रखरखाव भी विद्यालयीन व्यवहार का हिस्सा बने।
‘मेरी बेटी-मेरा अभिमान’ अभियान का उद्देश्य ईंट और सीमेंट से आगे जाकर बेटियों के सम्मान, सुरक्षा और आत्मविश्वास को मजबूत करना है। सुरक्षित और स्वच्छ विद्यालयी वातावरण से छात्राओं की उपस्थिति, पढ़ाई और आगे बढ़ने के अवसर बेहतर होंगे। स्वतंत्रता दिवस से गणतंत्र दिवस तक चलने वाला यह अभियान इस संकल्प को मजबूत करता है कि प्रदेश की बेटियों को शिक्षा और विकास के लिए सुरक्षित एवं सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराया जाए।
