रायपुर, 21 अगस्त 2026
कोण्डागांव जिले के दूरस्थ ग्राम कोनगुड़ में अब युवाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए रास्ते तैयार किए जा रहे हैं। नीति आयोग के सहयोग से यहां आकांक्षा ग्रामीण कौशल एवं नवाचार केंद्र विकसित किया जा रहा है। केंद्र का उद्देश्य दूरस्थ और वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों के युवाओं को रोजगार से जुड़े व्यावहारिक कौशल का प्रशिक्षण देकर उन्हें स्थायी आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना है।
गुरुवार को कांकेर सांसद श्री भोजराज नाग और विधायक श्री नीलकंठ टेकाम ने केंद्र का निरीक्षण कर वहां चल रहे प्रारंभिक प्रशिक्षण कार्यों और व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे युवाओं और पुनर्वासित व्यक्तियों से बातचीत की तथा उन्हें कौशल के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित किया।
केंद्र की स्थापना ऐसे क्षेत्र में हुई है, जहां कभी माओवादी हिंसा के कारण सामान्य गतिविधियां भी प्रभावित रहती थीं। अब उसी क्षेत्र में प्रशिक्षण, रोजगार और नवाचार को बढ़ावा देने वाली गतिविधियां शुरू होना बदलाव की तस्वीर पेश कर रहा है। सांसद श्री भोजराज नाग ने कहा कि क्षेत्र में शांति स्थापित होने के बाद अब विकास और आत्मनिर्भरता को आगे बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

विधायक श्री नीलकंठ टेकाम ने कहा कि माओवाद से प्रभावित रहे क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा होना सकारात्मक बदलाव का संकेत है। उन्होंने कहा कि पुनर्वासित लोगों को रोजगार से जोड़ने के साथ नई पीढ़ी को भी हिंसा से दूर रखकर विकास की मुख्यधारा से जोड़ना जरूरी है।
कलेक्टर श्रीमती नूपुर राशि पन्ना ने बताया कि केंद्र के प्रारंभिक चरण में 100 लोगों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इनमें 85 महिलाएं और चार आत्मसमर्पित व्यक्ति शामिल हैं। केंद्र के माध्यम से जिले के आत्मसमर्पित लोगों और उनके परिवारों को रोजगार के अवसरों से जोड़ने की दिशा में विशेष प्रयास किया जा रहा है।
पुलिस अधीक्षक श्री पंकज चन्द्रा ने बताया कि पुनर्वास नीति के तहत विभिन्न क्षेत्रों से करीब 154 आत्मसमर्पित माओवादी कैडरों को कोनगुड़ लाया गया। इनमें 45 से अधिक लोगों ने कौशल प्रशिक्षण लेने में रुचि दिखाई है। आने वाले दिनों में इन्हें भी प्रशिक्षण से जोड़ा जाएगा, ताकि वे रोजगार और स्वरोजगार के जरिए सामान्य जीवन में आगे बढ़ सकें।

प्रशिक्षण केंद्र में स्थानीय युवतियों को भी रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं। कोनगुड़ निवासी पार्वती मरापी केंद्र में स्टोर रूम का काम कर रही हैं। वहीं कल्पना पटेल ने बताया कि खेती-किसानी से जुड़े रहने के बाद उन्हें यहां प्रशिक्षण और काम का अवसर मिला, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। उन्होंने कहा कि अपनी पहली कमाई मां को देने की इच्छा है।
पुनर्वासित लोगों के लिए भी यह केंद्र नई शुरुआत का माध्यम बन रहा है। रजनू कोर्राम ने बताया कि उन्होंने करीब 13 वर्ष जंगल में बिताए और आत्मसमर्पण के बाद पुनर्वास केंद्र में प्रशिक्षण लिया। अब वे कोनगुड़ में प्रशिक्षण से जुड़कर दूसरों को भी कौशल सिखा रहे हैं।
आकांक्षा ग्रामीण कौशल एवं नवाचार केंद्र को सार्वजनिक-निजी भागीदारी के आधार पर रोजगारोन्मुखी मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना, मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना और एनएपीएस के तहत युवाओं का पंजीयन किया जा रहा है। केंद्र में हर वर्ष 1,000 से 1,500 युवाओं को प्रशिक्षण देने, पात्र युवाओं को अधिकतम 100 प्रतिशत प्लेसमेंट उपलब्ध कराने तथा गारमेंट उत्पादन इकाई के जरिए 300 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है।
कोनगुड़ में विकसित हो रहा यह केंद्र केवल एक प्रशिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि क्षेत्र में बदलती परिस्थितियों और विकास की नई दिशा का प्रतीक बन रहा है। कौशल, रोजगार और पुनर्वास को एक साथ जोड़कर यह पहल दूरस्थ क्षेत्रों के युवाओं को अपने ही क्षेत्र में बेहतर आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
