रायपुर, 21 अगस्त 2026
स्कूल शिक्षा विभाग की विगत दो वर्षों की उपलब्धियों और विभागीय गतिविधियों को लेकर नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद के ऑडिटोरियम में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव और विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने संयुक्त रूप से शिक्षा व्यवस्था में किए गए सुधारों, शिक्षक भर्ती एवं पदोन्नति, विद्यार्थियों की सुविधाओं, विद्यालय अधोसंरचना, बहुभाषी शिक्षा और तकनीक आधारित मॉनिटरिंग सहित विभिन्न कार्यों की जानकारी दी।
मंत्री श्री यादव ने कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी, तकनीक-सक्षम, समावेशी और विद्यार्थी-केंद्रित बनाना है। इसी दिशा में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अनुरूप 10,538 विद्यालयों का समायोजन किया गया है। युक्तियुक्तकरण के माध्यम से 15,165 शिक्षकों एवं प्राचार्यों का समायोजन किया गया, जबकि 453 शिक्षकविहीन विद्यालयों और 4,729 एकल शिक्षकीय विद्यालयों में शिक्षकों की व्यवस्था की गई है।

शिक्षकों की पदोन्नति और भर्ती के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। कुल 2,813 प्राचार्यों की पदोन्नति के साथ विभिन्न पदों पर सात हजार से अधिक पदोन्नतियां की गई हैं। पिछले दो वर्षों में 2,104 शैक्षणिक पदों पर सीधी भर्ती हुई है, जबकि पांच हजार शिक्षकीय पदों की भर्ती प्रक्रिया जारी है। स्वामी आत्मानंद और स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालयों में तीन हजार से अधिक संविदा पदों पर भर्ती प्रक्रिया भी चल रही है।
शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए ऑनलाइन कंप्यूटर आधारित परीक्षा, आधार आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति और डिजिटल प्रशासनिक व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। टीके एप के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 85 प्रतिशत शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज हो रही है। वहीं एआई आधारित विद्या समीक्षा केंद्र के माध्यम से विद्यालयों और विभिन्न योजनाओं की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जा रही है।
बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कक्षा 1 से 3 तक छत्तीसगढ़ी, गोंडी, हल्बी और सादरी जैसी भाषाओं में पाठ्यपुस्तक निर्माण की प्रक्रिया जारी है। बस्तर और सरगुजा संभाग के हजारों शिक्षकों को स्थानीय भाषाओं के उपयोग के लिए प्रशिक्षण दिया गया है। विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तक, गणवेश और साइकिल जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। पाठ्यपुस्तक वितरण की बारकोड आधारित व्यवस्था से शासन को लगभग 40 करोड़ रुपये की बचत होने की जानकारी दी गई।

विद्यालय अधोसंरचना को मजबूत करने पर भी सरकार का विशेष जोर है। पिछले तीन वर्षों में 504 नए विद्यालयों की स्वीकृति दी गई है, जबकि वित्तीय वर्ष 2026-27 में 700 भवनविहीन विद्यालयों के लिए प्रावधान किया गया है। 2,583 अतिरिक्त कक्षों की स्वीकृति के साथ विद्यालयों के शौचालय निर्माण एवं मरम्मत के लिए 52 करोड़ 39 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। 150 स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालयों के भवन निर्माण एवं संचालन के लिए बजट में 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
बस्तर और आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा की पहुंच बढ़ाने के लिए भी विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। बंद विद्यालयों को फिर से शुरू करने, नए विद्यालय खोलने, शिक्षा दूतों के माध्यम से शिक्षण व्यवस्था संचालित करने और विशेष पिछड़ी जनजाति के विद्यार्थियों के लिए आवासीय सुविधाएं विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। प्रदेश के 156 आवासीय विद्यालयों एवं छात्रावासों में 33 हजार से अधिक बच्चे आवासीय सुविधा का लाभ ले रहे हैं।
मंत्री श्री यादव ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के प्रत्येक विद्यार्थी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और समान अवसर उपलब्ध हों। शिक्षकों की उपलब्धता, आधुनिक अधोसंरचना, बहुभाषी शिक्षा, डिजिटल तकनीक और दूरस्थ क्षेत्रों तक शिक्षा की पहुंच को मजबूत करते हुए प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाने का काम लगातार जारी रहेगा।
