रायपुर, 13 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ विधानसभा के पावस सत्र के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पद्म विभूषण से सम्मानित विश्वविख्यात पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके निधन से छत्तीसगढ़ ने अपनी लोकसंस्कृति का एक अनमोल रत्न खो दिया है और कला एवं सांस्कृतिक जगत को अपूरणीय क्षति पहुंची है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने पंडवानी गायन की कापालिक शैली को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाते हुए अपनी विलक्षण प्रतिभा से छत्तीसगढ़ की लोककला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। उनकी प्रस्तुतियों में गायन और अभिनय का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता था। ओजपूर्ण वाणी, प्रभावशाली प्रस्तुति और पात्रों के सजीव चित्रण ने उन्हें विश्वभर में विशिष्ट पहचान दिलाई।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि डॉ. तीजन बाई का जीवन संघर्ष, साधना और समर्पण का प्रेरक उदाहरण है। जिस समय महिलाओं की पंडवानी गायन में भागीदारी बेहद सीमित थी, उस दौर में उन्होंने सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती देते हुए अपनी अलग पहचान बनाई और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनीं। उन्होंने एशिया, यूरोप सहित दुनिया के कई देशों में अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच तक पहुंचाया।
डॉ. तीजन बाई के कला क्षेत्र में अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री, पद्मभूषण, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया गया। वर्ष 2019 में भारत सरकार ने उन्हें देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से अलंकृत किया। यह सम्मान प्राप्त करने वाली वे छत्तीसगढ़ की एकमात्र विभूति थीं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय मंत्रियों ने भी डॉ. तीजन बाई के निधन पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके कला क्षेत्र में दिए गए अमूल्य योगदान को याद किया है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि राज्योत्सव के अवसर पर रायपुर प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉ. तीजन बाई के परिजनों से दूरभाष पर बातचीत कर उनका कुशलक्षेम जाना था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अनेक विश्वविद्यालयों ने डॉ. तीजन बाई को डी.लिट्. की मानद उपाधि से सम्मानित किया था। भारतीय लोकसंगीत और लोकसंस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन में उनका योगदान सदैव स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगा। उनकी कला, साधना और समर्पण आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने और उसे आगे बढ़ाने की प्रेरणा देते रहेंगे।
सदन की ओर से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दिवंगत डॉ. तीजन बाई को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ईश्वर से उनकी पुण्यात्मा की शांति तथा शोकाकुल परिजनों, प्रशंसकों और कला जगत को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।
