रायपुर | 13 जुलाई 2026
छत्तीसगढ़ में फसल विविधीकरण किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बनता जा रहा है। सक्ती जिले के मालखरौदा विकासखंड के ग्राम दिमानी के प्रगतिशील किसान दाऊ लाल ने परंपरागत ग्रीष्मकालीन धान की खेती छोड़कर उड़द की खेती अपनाई और कम लागत में बेहतर उत्पादन व मुनाफा हासिल किया।
किसान दाऊ लाल के पास कुल 4.5 एकड़ कृषि भूमि है। पहले वे ग्रीष्मकालीन धान की खेती करते थे, जिसमें अधिक सिंचाई, बढ़ती लागत और मिट्टी की उर्वरता में कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता था। कृषि विभाग की सलाह पर उन्होंने 2.5 एकड़ भूमि में कोटा उड़द-04 किस्म की बुवाई की।
महज 70 दिनों में फसल तैयार हो गई और उन्हें 15 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ। उड़द की खेती में करीब 22,500 रुपये की लागत आई, जबकि फसल बेचकर लगभग 1.10 लाख रुपये की आय हुई। इस तरह कम समय, कम लागत और कम पानी में उन्हें बेहतर मुनाफा मिला।
दाऊ लाल का कहना है कि उड़द की खेती में धान की तुलना में सिंचाई की आवश्यकता काफी कम होती है। साथ ही कीट एवं रोगों का प्रकोप भी कम रहता है, जिससे खेती का जोखिम और खर्च दोनों घट जाते हैं। इस सफलता के बाद उन्होंने भविष्य में दलहनी फसलों का रकबा बढ़ाने का निर्णय लिया है।
कृषि विभाग के अनुसार जल संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए दलहन, तिलहन और मक्का जैसी वैकल्पिक फसलों को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। किसानों को उन्नत बीज, आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक खेती का प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
