रायपुर | 26 जून 2026
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने केंद्र सरकार की कथित कर (टैक्स) नीति को लेकर सवाल उठाए हैं। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने आरोप लगाया कि विदेशी क्लाउड और एआई कंपनियों को वर्ष 2047 तक आयकर में विशेष छूट दी जा रही है, जबकि भारतीय कंपनियों को ऐसी कोई अतिरिक्त रियायत नहीं मिल रही। कांग्रेस ने इसे ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ की भावना के विपरीत बताया।
‘स्वदेशी कंपनियों के साथ समान व्यवहार नहीं’
सुरेंद्र वर्मा ने कहा कि यदि विदेशी कंपनियों को कर छूट दी जा रही है तो घरेलू कंपनियों को भी समान लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियां भारतीय उद्योगों के बजाय विदेशी कंपनियों के पक्ष में दिखाई देती हैं।
यह भी पढ़ें: ₹235 करोड़ की पहली यूनिट से 4,600+ रोजगार, 81 एकड़ ……….. आगे पढ़ें
रोजगार और कानूनों को लेकर भी उठाए सवाल
कांग्रेस का दावा है कि विदेशी कंपनियों के लिए भारत में स्थायी कार्यालय (Permanent Establishment) की अनिवार्यता नहीं होने से दीर्घकालिक रोजगार सृजन और श्रम कानूनों के पालन पर भी असर पड़ सकता है। पार्टी ने कहा कि इससे स्थानीय उद्योगों को प्रतिस्पर्धा में नुकसान हो सकता है।
डेटा सेंटर, संसाधन और टैक्स नीति पर सरकार को घेरा
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि विदेशी डेटा सेंटर कंपनियों को कर राहत के साथ पानी और बिजली जैसे संसाधनों का भी लाभ दिया जा रहा है, जबकि आम नागरिक बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। पार्टी ने कहा कि सरकार की प्राथमिकताएं स्थानीय उद्योगों की बजाय विदेशी कंपनियों पर केंद्रित हैं।
कांग्रेस ने उठाए ये प्रमुख सवाल
कांग्रेस ने केंद्र सरकार से पूछा कि यदि आम बजट में कर व्यवस्था हर वर्ष तय होती है, तो विदेशी क्लाउड और एआई कंपनियों को वर्ष 2047 तक विशेष कर छूट किस आधार पर दी गई। पार्टी ने यह भी सवाल उठाया कि क्या यह नीति भारतीय कंपनियों के साथ समान व्यवहार के सिद्धांत के अनुरूप है।
नोट: यह कांग्रेस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित राजनीतिक बयान है। केंद्र सरकार की ओर से इस संबंध में तत्काल कोई प्रतिक्रिया इस प्रेस विज्ञप्ति में शामिल नहीं है।
