रायपुर। प्रदेश में खरीफ सीजन की तैयारियों के बीच उर्वरक की उपलब्धता को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने आरोप लगाया है कि राज्य में खाद संकट गहराता जा रहा है और किसानों को सोसायटियों में पर्याप्त मात्रा में उर्वरक नहीं मिल पा रहा है।
बिना खाद के खेती कैसे करेंगे किसान?
सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि जून का अधिकांश समय बीत चुका है, लेकिन प्रदेश की कई सहकारी समितियों में अब तक पर्याप्त खाद नहीं पहुंची है। किसान लगातार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से उर्वरक उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि खरीफ सीजन में धान की खेती राज्य के किसानों की आय का प्रमुख आधार है। यदि समय पर खाद उपलब्ध नहीं हुई तो किसानों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।
सरकार की तैयारी पर उठाए सवाल
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रदेश की आधे से कम सोसायटियों में ही अब तक उर्वरक पहुंच पाया है। मानसून के आगमन के साथ किसानों को बुआई की तैयारी करनी है, लेकिन खाद की कमी चिंता का विषय बनी हुई है।
सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि पिछले खरीफ सीजन में भी किसानों को यूरिया, डीएपी और पोटाश के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा था। इस बार भी स्थिति वैसी ही दिखाई दे रही है। उनका दावा है कि राज्य में अनुमानित मांग के अनुरूप उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण नहीं किया गया है।
कालाबाजारी और जमाखोरी का आरोप
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि पिछले सीजन में खाद की कमी के कारण किसानों को खुले बाजार में कई गुना अधिक कीमत पर उर्वरक खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ा था। उन्होंने कहा कि किसानों को निर्धारित कीमत से कहीं अधिक दरों पर यूरिया और डीएपी खरीदना पड़ा, जबकि सरकार स्थिति को नियंत्रित करने में विफल रही।
कांग्रेस का आरोप है कि नकली और अमानक खाद की बिक्री तथा कालाबाजारी पर भी प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
श्वेत पत्र जारी करने की मांग
सुशील आनंद शुक्ला ने राज्य सरकार से उर्वरकों की उपलब्धता और वितरण की स्थिति पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि किसानों की जरूरतों के अनुरूप कितनी मात्रा में खाद उपलब्ध है और खरीफ सीजन के लिए क्या तैयारी की गई है।
कांग्रेस ने मांग की है कि किसानों को समय पर और पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराया जाए ताकि खेती प्रभावित न हो और किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
