रायपुर। छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा है कि प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हो चुकी हैं और सरकारी अस्पतालों में मरीजों को समुचित इलाज तक नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में नकली, अमानक और गुणवत्ताहीन दवाओं का वितरण हो रहा है, जिससे मरीजों की जान खतरे में पड़ रही है।
सरकारी अस्पतालों की स्थिति पर उठाए सवाल
वंदना राजपूत ने कहा कि राजधानी रायपुर सहित प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों और सरकारी अस्पतालों में लगातार नकली एवं अमानक दवाओं के मामले सामने आ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि मेकाहारा जैसे बड़े अस्पताल में मरीजों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल रही हैं और एक ही बेड पर दो प्रसूताओं को बच्चों के साथ रखने की नौबत आ रही है।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि अस्पतालों में एमआरआई और सीटी स्कैन जैसी आवश्यक सुविधाओं से जुड़ी सामग्री की भी कमी बनी हुई है।
नकली और गुणवत्ताहीन दवाओं को लेकर सरकार घिरी
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि बच्चों को वितरित की गई कृमिनाशक दवाएं जांच में अमानक पाई गईं, डायरिया मरीजों को दी गई दवाओं में फंगस मिला और कई एंटीबायोटिक दवाओं से मरीजों में एलर्जी की शिकायतें सामने आई हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि गर्भवती महिलाओं को वितरित आयरन और फोलिक एसिड की दवाओं की गुणवत्ता पर भी सवाल उठे हैं।
उनका कहना है कि ग्लूकोज की बोतलों से लेकर पैरासिटामोल, एल्बेंडाजोल, सर्जिकल ब्लेड और प्रेगनेंसी किट तक कई उत्पाद गुणवत्ता जांच में मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं।
सप्लायर कंपनियों पर कार्रवाई की मांग
वंदना राजपूत ने सवाल उठाया कि जिन दवा कंपनियों के उत्पादों पर देश के अन्य राज्यों में प्रतिबंध लगाया गया है, उनकी दवाएं प्रदेश में कैसे बिक रही हैं। उन्होंने पूछा कि डॉक्टरों की शिकायतों के बावजूद संबंधित सप्लायर कंपनियों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि गुणवत्ताहीन दवाओं की आपूर्ति के पीछे किसी न किसी स्तर पर संरक्षण मिल रहा है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग
प्रदेश कांग्रेस ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग करते हुए स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल को पद से हटाने की मांग की है। कांग्रेस का कहना है कि यदि प्रदेश के विभिन्न अस्पतालों में लगातार अमानक दवाओं के मामले सामने आ रहे हैं, तो इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही या मिलीभगत के बिना इतने बड़े स्तर पर गुणवत्ताहीन दवाओं की आपूर्ति संभव नहीं है और सरकार को इस पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
