रायगढ़। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत रायगढ़ जिले में टीबी मुक्त भारत अभियान को जनभागीदारी के माध्यम से नई गति मिल रही है। जिले की 550 ग्राम पंचायतों में से 358 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया जा चुका है। यह उपलब्धि शासन, प्रशासन, औद्योगिक संस्थानों और समाज की सामूहिक भागीदारी का परिणाम मानी जा रही है।
कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित जिला स्तरीय क्षय उन्मूलन कार्यकारिणी की अंतरविभागीय बैठक में कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी ने प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत उत्कृष्ट योगदान देने वाले निक्षय मित्रों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य केवल सरकारी प्रयासों से हासिल नहीं किया जा सकता, बल्कि इसके लिए समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।

औद्योगिक संस्थान निभा रहे महत्वपूर्ण भूमिका
बैठक में जानकारी दी गई कि जिले के कई प्रमुख औद्योगिक संस्थान टीबी उन्मूलन अभियान में सक्रिय सहयोग प्रदान कर रहे हैं। इनमें एनटीपीसी लारा, जेपीएल, हिंडालको, अडानी, जिंदल साउथ वेस्ट स्टील, सारडा एनर्जी एंड मिनरल्स, नालवा, जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड तथा एसईसीएल शामिल हैं।

इन संस्थानों द्वारा उपचाररत टीबी मरीजों को गोद लेकर उन्हें नियमित फूड बास्केट, पोषण सहायता और अन्य आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही जांच और उपचार सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए लैब तकनीशियनों की व्यवस्था भी की जा रही है।
टीबी मरीजों के उपचार और पोषण सहायता की समीक्षा
बैठक के दौरान टीबी मरीजों की वर्तमान स्थिति, उपचार सफलता दर, निक्षय पोषण योजना के अंतर्गत भुगतान, टीबी प्रिवेंटिव थेरेपी तथा टीबी मुक्त पंचायत अभियान की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार जगत ने बताया कि जिले में टीबी नियंत्रण और उन्मूलन की दिशा में लगातार सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि 358 ग्राम पंचायतों का टीबी मुक्त घोषित होना जिले के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और शेष पंचायतों को भी जल्द इस श्रेणी में शामिल करने के लिए प्रयास जारी हैं।
समाज की भागीदारी से मजबूत हो रहा अभियान
कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने निक्षय मित्रों और औद्योगिक संस्थानों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनके सहयोग से टीबी मरीजों को बेहतर उपचार, पोषण और मानसिक संबल मिल रहा है। उन्होंने सभी संस्थानों और नागरिकों से अभियान में लगातार सहयोग देने की अपील की।
प्रशासन का मानना है कि जनभागीदारी आधारित यह मॉडल न केवल टीबी मरीजों को सहायता प्रदान कर रहा है, बल्कि समाज में जागरूकता बढ़ाने और बीमारी के उन्मूलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
