रायपुर, 2 नवंबर 2026
छत्तीसगढ़ ऊर्जा क्षेत्र में निवेश, नवाचार और हरित विकास की व्यापक संभावनाओं के साथ देश और दुनिया के निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण गंतव्य के रूप में उभर रहा है। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन एवं एक्सपो-2026 में राज्य ने अपनी ऊर्जा क्षमता, निवेश के अवसरों और भविष्य की कार्ययोजना को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को चार दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने उच्चस्तरीय गोलमेज बैठक में हिस्सा लेते हुए अगले पांच वर्षों में छत्तीसगढ़ के ऊर्जा क्षेत्र में लगभग 5.60 लाख करोड़ रुपये के निवेश की संभावनाओं की जानकारी दी और देश-विदेश के निवेशकों तथा उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को प्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित किया।
सम्मेलन में केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी तथा केंद्रीय विद्युत एवं नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्री श्रीपाद नाइक सहित विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और ऊर्जा क्षेत्र के प्रमुख प्रतिनिधि उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में ऊर्जा क्षेत्र के विस्तार के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है। इसके तहत 23 हजार 923 मेगावाट क्षमता की नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में लगभग 1.33 लाख करोड़ रुपये और ताप विद्युत उत्पादन क्षमता के विस्तार में लगभग 3.27 लाख करोड़ रुपये के निवेश की योजना है। राज्य सरकार ने वर्ष 2030 तक प्रदेश की हरित ऊर्जा क्षमता को वर्तमान 3 हजार मेगावाट से बढ़ाकर 15 हजार मेगावाट करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके साथ ही बिजली की कुल मांग में हरित ऊर्जा की हिस्सेदारी वर्तमान 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 45 प्रतिशत से अधिक करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने वर्ष 2030 तक गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों से 500 गीगावाट बिजली उत्पादन क्षमता विकसित करने का राष्ट्रीय लक्ष्य तय किया है। इस लक्ष्य को हासिल करने में छत्तीसगढ़ महत्वपूर्ण योगदान देगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों की उत्पादन क्षमता 28 हजार मेगावाट से अधिक है। बिजली की बढ़ती मांग और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए राज्य सरकार ताप विद्युत के साथ सौर ऊर्जा, जल विद्युत, बायोमास और ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं का संतुलित विकास कर रही है।
बिजली की निर्बाध और भरोसेमंद आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ऊर्जा भंडारण सुविधाओं के विकास पर विशेष ध्यान दे रही है। मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि प्रदेश में 12 हजार 300 मेगावाट की कुल क्षमता वाली 10 पंप स्टोरेज जल विद्युत परियोजनाओं की पहचान की गई है। इन परियोजनाओं में लगभग 65 हजार करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है। इसके अलावा अगले दो वर्षों में प्रदेश में 10 हजार मेगावाट-घंटे क्षमता की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली स्थापित करने की योजना है। राजनांदगांव में 100 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजना के साथ 40 मेगावाट/120 मेगावाट-घंटे क्षमता की बैटरी भंडारण प्रणाली पहले से संचालित है।
मुख्यमंत्री ने राजनांदगांव जिले के खैरा गांव का उल्लेख करते हुए बताया कि यह छत्तीसगढ़ का पहला पूर्ण रूप से सौर ऊर्जा से संचालित गांव बन गया है। गांव के सभी 141 घरों की छतों पर 2-2 किलोवाट क्षमता के सोलर पैनल लगाए गए हैं, जिनसे कुल 282 किलोवाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। विशेष बात यह है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत निर्मित 93 घरों में भी सौर ऊर्जा से बिजली उपलब्ध कराई जा रही है और इसके लिए ग्रामीणों को कोई खर्च नहीं करना पड़ा है।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार घरों और खेतों तक सौर ऊर्जा का लाभ पहुंचाने के लिए भी तेजी से काम कर रही है। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत प्रदेश में अब तक लगभग 1.26 लाख सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। वहीं, 1.66 लाख सौर सिंचाई पंपों के माध्यम से लगभग 1.94 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि में सिंचाई की जा रही है। प्रधानमंत्री कुसुम योजना के अंतर्गत भी कुल 395 मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने की योजना है। इन पहलों से स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के साथ किसानों और आम उपभोक्ताओं को भी लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ में बायोगैस, बायो-एथेनॉल, ग्रीन हाइड्रोजन और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भी निवेश की व्यापक संभावनाएं हैं। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश में कृषि अवशेष, गोबर और अन्य जैविक संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता है। इनके उपयोग से कंप्रेस्ड बायोगैस, बायो-एथेनॉल और ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन किया जा सकता है। राज्य सरकार इन संसाधनों को नए उद्योगों और निवेश के अवसरों में बदलने की दिशा में काम कर रही है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में कुल 80 मीट्रिक टन क्षमता वाले आठ कंप्रेस्ड बायोगैस संयंत्र स्थापित करने की दिशा में कार्य चल रहा है। इन परियोजनाओं में लगभग 800 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। इसके अतिरिक्त निजी निवेशकों से प्राप्त लगभग 6 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों पर भी प्रक्रिया जारी है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में लगभग 4 हजार 200 मेगावाट क्षमता के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों सहित विभिन्न ऊर्जा परियोजनाओं में लगभग 1.60 लाख करोड़ रुपये के निवेश की परिकल्पना की गई है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार औद्योगिक विकास, ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ रही है। राज्य का प्रयास है कि उपलब्ध ऊर्जा संसाधनों का अधिकतम उपयोग हो, नए उद्योग स्थापित हों और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अधिक अवसर सृजित किए जा सकें। उन्होंने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार ऊर्जा क्षेत्र में निवेश और नई परियोजनाओं की स्थापना के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ के प्रदर्शनी स्टॉल का अवलोकन किया। यहां प्रदेश की प्रमुख ऊर्जा परियोजनाओं, नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों, आधुनिक तकनीक और निवेश की संभावनाओं को प्रदर्शित किया गया है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से विभिन्न परियोजनाओं की जानकारी ली और देश-विदेश से आए निवेशकों तथा उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से चर्चा की। उन्होंने छत्तीसगढ़ की औद्योगिक नीतियों, उपलब्ध संसाधनों और ऊर्जा क्षेत्र में विकसित हो रही अधोसंरचना के बारे में जानकारी साझा करते हुए निवेशकों को प्रदेश में उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया।
उल्लेखनीय है कि 2 से 5 नवंबर तक आयोजित इस वैश्विक सम्मेलन में 130 से अधिक देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इसमें 40 से अधिक मंत्री, नीति निर्माता, निवेशक और ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हैं। ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क, यूरोपीय संघ, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड, नॉर्वे, स्वीडन और यूनाइटेड किंगडम सहित नौ देश एवं समूह कंट्री पार्टनर के रूप में सम्मेलन में भाग ले रहे हैं। सम्मेलन में छत्तीसगढ़ सहित 13 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने अपनी ऊर्जा क्षमता और निवेश की संभावनाओं को प्रस्तुत किया।
‘निवेश, नवाचार और प्रेरणा’ की थीम पर आयोजित यह सम्मेलन छत्तीसगढ़ के लिए अपनी पारंपरिक बिजली उत्पादन क्षमता के साथ-साथ हरित ऊर्जा, आधुनिक तकनीक और ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में भविष्य की योजनाओं को वैश्विक निवेशकों के सामने रखने का महत्वपूर्ण मंच बना है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह सहित छत्तीसगढ़ के अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।
