रायपुर, 2 नवंबर 2026
राज्योत्सव 2026 के शिल्प ग्राम में छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोककला और प्राचीन शिल्प परंपरा की खूबसूरत झलक देखने को मिल रही है। मिट्टी से बने पारंपरिक बर्तन, आकर्षक मूर्तियां, दीये और हस्तनिर्मित कलाकृतियां लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। यहां पहुंच रहे लोग इन कलाकृतियों को देखने के साथ उनकी निर्माण प्रक्रिया और पारंपरिक उपयोग के बारे में भी जानकारी ले रहे हैं।
शिल्प ग्राम में प्रदर्शित मिट्टी के घड़े, सुराही, मटके, कुल्हड़ और हांडी जैसी वस्तुएं लोगों को पुरानी जीवनशैली की याद दिला रही हैं। कभी दैनिक जीवन का अहम हिस्सा रहे मिट्टी के ये बर्तन आज आधुनिक बर्तनों के बीच अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं। खासकर नई पीढ़ी इन पारंपरिक वस्तुओं को देखकर उनके उपयोग और निर्माण की कला के बारे में जानने में रुचि दिखा रही है।
आगामी दीपावली पर्व को देखते हुए मिट्टी के दीयों और कलात्मक मूर्तियों की विशेष मांग देखने को मिल रही है। अलग-अलग आकार और आकर्षक डिजाइन में तैयार दीये तथा मूर्तियां लोगों को खूब पसंद आ रही हैं। पर्यावरण के अनुकूल इन हस्तनिर्मित उत्पादों की खरीदारी के जरिए लोग स्थानीय कारीगरों के हुनर को भी प्रोत्साहित कर रहे हैं। दीपावली पर मिट्टी के दीयों से घर रोशन करने और पारंपरिक मूर्तियों से सजावट करने की परंपरा आज भी लोगों के बीच खास महत्व रखती है।
शिल्प ग्राम में मिट्टी की कलाकृतियों का प्रदर्शन केवल खरीदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और पारंपरिक जीवनशैली से जोड़ने का अवसर भी दे रहा है। इन वस्तुओं के माध्यम से छत्तीसगढ़ के कुम्हारों और शिल्पकारों की पीढ़ियों से चली आ रही कला, मेहनत और रचनात्मकता सामने आ रही है।
शासन द्वारा शिल्पकारों को प्रोत्साहित करने के प्रयासों के बीच राज्योत्सव का शिल्प ग्राम पारंपरिक कला को नई पहचान देने का मंच बन रहा है। मिट्टी की इन कलाकृतियों में छत्तीसगढ़ की संस्कृति, लोकजीवन और परंपराओं की आत्मीय झलक दिखाई दे रही है। लोगों की बढ़ती रुचि स्थानीय कुम्हारों और हस्तशिल्प कलाकारों के उत्पादों को बाजार और पहचान दिलाने में भी मददगार साबित हो रही है।
