रायपुर, 2 नवंबर 2026
राज्योत्सव परिसर स्थित शिल्पग्राम में ग्रामोद्योग विकास विभाग का रेशम उत्पादन स्टॉल किसानों और आम नागरिकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां बड़ी संख्या में लोग रेशम कीटपालन की प्रक्रिया समझने और प्राकृतिक रेशम के विभिन्न प्रकारों को करीब से देखने पहुंच रहे हैं। स्टॉल पर रेशम के कीड़ों से लेकर धागा तैयार करने तक की प्रक्रिया की जानकारी दी जा रही है।
स्टॉल में मलबरी सफेद कोया, मलबरी रंगीन कोया, मलबरी पीला मैसूर, मलबरी सफेद रिल्ड, टसर स्पन धागा, टसर बाना धागा, डाबा पालित कोसा और रैली साबू बीज सहित रेशम के विभिन्न प्रकार प्रदर्शित किए गए हैं। इनसे तैयार धागों का उपयोग कोसा और मलबरी सिल्क के साथ बनारसी एवं कांजीवरम जैसी पारंपरिक साड़ियों के निर्माण में किया जाता है। आगंतुक यहां रेशम के प्रकारों, उत्पादन की तकनीक और वस्त्र निर्माण की प्रक्रिया के बारे में जानकारी ले रहे हैं।
स्टॉल में टसर धागा विक्रय केंद्र भी बनाया गया है, जहां प्रदेश के अलग-अलग जिलों के विशिष्ट सिल्क उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं। इनमें सारंगढ़ का समलेश्वरी मलबरी एवं टसर सिल्क, सरगुजा का महामाया सिल्क, जगदलपुर का दंतेश्वरी सिल्क, कांकेर का अरण्य सिल्क, महासमुंद का खल्लारी सिल्क, रायगढ़ का फॉरेस्ट गोल्ड सिल्क, गरियाबंद का गंडेश्वर सिल्क और जांजगीर-चांपा का प्रसिद्ध चांपा सिल्क शामिल हैं। इसके साथ ही टसर बीजागर और स्पिनिंग मशीन के माध्यम से धागा तैयार करने की प्रक्रिया का जीवंत प्रदर्शन भी किया जा रहा है।
विभागीय स्टॉल पर किसानों को शहतूत रेशम उत्पादन से जुड़ी योजनाओं की जानकारी भी दी जा रही है। विशेष रूप से नवीन शहतूत रेशम बाड़ी योजना के प्रति लघु एवं सीमांत किसानों की रुचि देखने को मिल रही है। इस योजना के तहत निजी भूमि पर एक एकड़ क्षेत्र में शहतूत के पौधरोपण और रेशम कीटपालन को प्रोत्साहित किया जाता है। इसके लिए पौधरोपण एवं संधारण, कीटपालन भवन, आवश्यक उपकरण और सिंचाई सुविधाओं हेतु आर्थिक सहायता का प्रावधान है। किसानों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए पौधरोपण के बाद शहतूत की खेती और रेशम कीटपालन का एक माह का निःशुल्क प्रशिक्षण भी दिया जाता है।
शहतूत रेशम कीटपालन कृषि आधारित कुटीर उद्योग है, जिसे खेती-किसानी के साथ अपनाया जा सकता है। इसमें परिवार के सदस्यों की भागीदारी से रोजगार और अतिरिक्त आय के अवसर विकसित होते हैं। श्रम आधारित यह गतिविधि ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका का साधन बनने के साथ किसानों को कम समय में आमदनी उपलब्ध कराने की क्षमता रखती है। राज्योत्सव के शिल्पग्राम में लगाया गया यह स्टॉल किसानों को रेशम उत्पादन की संभावनाओं, तकनीक और सरकारी सहायता से परिचित कराने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है।
