धमतरी, 22 सितंबर 2026
धमतरी जिले में खेती के साथ किसानों की अतिरिक्त और दीर्घकालीन आय का नया रास्ता तैयार किया जा रहा है। सेवा संकल्प अभियान के तहत जिले के अलग-अलग विकासखंडों के 202 किसानों ने कुल 4,126 नारियल पौधे लगाने के लिए सहमति दी है। खेतों की मेड़, बागवानी क्षेत्र और अन्य उपयुक्त स्थानों पर लगाए जाने वाले ये पौधे आने वाले वर्षों में किसानों के लिए अतिरिक्त आय का आधार बनने के साथ जिले में हरियाली बढ़ाने में भी भूमिका निभाएंगे।
कृषकों की मांग और स्वीकृति के आधार पर नारियल बोर्ड, कोण्डागांव से पौध प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। 23 सितंबर को संबंधित मैदानी अधिकारी किसानों की सूची और आवश्यक प्रकरणों के साथ कोण्डागांव पहुंचकर निर्धारित प्रक्रिया के तहत पौधे प्राप्त करेंगे। इसके बाद स्वीकृत संख्या के अनुसार किसानों को पौधों का वितरण किया जाएगा।
धमतरी में नारियल को बढ़ावा देने की यह पहल केवल नए पौधे लगाने तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य कृषि में विविधता लाते हुए किसानों को पारंपरिक फसलों के अतिरिक्त ऐसे विकल्प से जोड़ना है, जो लंबे समय तक उत्पादन दे सके। बहुवर्षीय फसल होने के कारण शुरुआती वर्षों की देखभाल के बाद नारियल लंबे समय तक उत्पादन देने में सक्षम हो सकता है। ऐसे में खेत की मेड़ या ऐसी भूमि, जिसका खेती में सीमित उपयोग होता है, वहां नारियल का रोपण किसानों के लिए उपलब्ध कृषि संसाधनों के बेहतर उपयोग का माध्यम बन सकता है।
जिले में इस दिशा में पहले भी सामुदायिक स्तर पर प्रयास किए जा चुके हैं। महानदी जागरूकता अभियान यानी एमएए (Mahanadi Awakening Abhiyan) के तहत पिछले वर्ष जुलाई में फरसियां से गणेशघाट तक करीब 14 किलोमीटर क्षेत्र में लगभग 4,000 नारियल पौधों का वृहद रोपण किया गया था। अभियान की शुरुआत कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने नारियल का पौधा लगाकर की थी। जनप्रतिनिधियों, सरपंचों और ग्रामीणों की भागीदारी ने इस अभियान को व्यापक स्वरूप दिया था।
नगरी क्षेत्र में नारियल की संभावनाओं को लेकर किए गए परीक्षणों से भी इसके विस्तार की उम्मीद बढ़ी है। कृषि विज्ञान केंद्र और विशेषज्ञ संस्थानों के माध्यम से किए गए परीक्षणों में क्षेत्र की भौगोलिक एवं जलवायु परिस्थितियां नारियल रोपण के लिए अनुकूल पाई गई हैं। इससे किसानों के खेतों, मेड़ों और घरों के आसपास उपलब्ध उपयुक्त स्थानों पर नारियल के पौधे लगाने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।
नारियल की खासियत केवल इसके फल तक सीमित नहीं है। नारियल पानी, तेल, रेशा और इससे जुड़े अन्य उत्पादों का विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग होता है। भविष्य में स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन की गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है तो इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और छोटे उद्यमों के नए अवसर भी विकसित हो सकते हैं। साथ ही, फसल विविधीकरण के जरिए किसानों की आय को केवल पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहने से बचाने की दिशा में भी यह पहल उपयोगी हो सकती है।
नारियल क्षेत्र को लगातार विस्तार देने के लिए ग्राम सेमरा में नर्सरी तैयार की जा रही है। स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित होने से आने वाले समय में किसानों को रोपण सामग्री आसानी से उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। इससे जिले में नारियल की खेती का क्रमिक विस्तार करने का आधार भी तैयार होगा।
उद्यानिकी विभाग किसानों को नारियल रोपण से जुड़ी तकनीकी जानकारी भी उपलब्ध कराएगा। इसके तहत पौध लगाने के लिए उपयुक्त स्थान के चयन, पौधों के बीच आवश्यक दूरी, सिंचाई, पोषण प्रबंधन, पौध संरक्षण और शुरुआती देखभाल के संबंध में मार्गदर्शन दिया जाएगा। इससे किसानों को पौधों की बेहतर देखभाल और भविष्य में उत्पादन की संभावनाओं को मजबूत करने में सहायता मिलेगी।
धमतरी में नारियल रोपण को पर्यावरण और आजीविका दोनों से जोड़कर आगे बढ़ाया जा रहा है। महानदी के तटवर्ती क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाने के साथ खेतों की मेड़ों पर नारियल के वृक्ष ग्रामीण परिदृश्य को भी नया स्वरूप दे सकते हैं। वहीं, पेड़ों के उत्पादन में आने के बाद किसानों को दीर्घकालीन अतिरिक्त आय का अवसर मिलने की संभावना है।
आज लगाया गया नारियल का एक पौधा तत्काल आय का साधन नहीं बनेगा, लेकिन उचित देखभाल के साथ आने वाले वर्षों में यह परिवार की आय का स्थायी हिस्सा बन सकता है। इसी सोच के साथ धमतरी में नारियल रोपण को महज पौधरोपण अभियान के बजाय कृषि विविधीकरण, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक दीर्घकालीन पहल के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है।
विशेष लेख — एस.आर. पाराशर, उप संचालक
