रायपुर, 04 सितंबर 2026
धमतरी की नदी किनारे की जमीन अब सिर्फ धान की खेती तक सीमित नहीं रहेगी। महानदी, पैरी, सोंढूर और खारून के कछार क्षेत्र में खेती को ज्यादा लाभदायक और जोखिममुक्त बनाने के लिए फसल विविधीकरण की व्यापक योजना तैयार की गई है। जिले के 152 गांवों में लागू होने वाली इस पहल से करीब 38 हजार किसान और 30,841.96 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र सीधे जुड़ेंगे। योजना का उद्देश्य धान की खेती खत्म करना नहीं, बल्कि किसानों को एक ही फसल पर निर्भरता से बाहर निकालकर उनकी जमीन और पानी की उपलब्धता के अनुसार खेती के नए विकल्प देना है।
सितंबर-अक्टूबर से शुरू होने वाली इस पहल में नदी किनारे की जमीन को उसकी ऊंचाई, जलभराव और जल निकासी की स्थिति के आधार पर अलग-अलग कृषि क्षेत्रों में बांटा गया है। अति निम्न और बाढ़ प्रभावित इलाकों में धान के साथ खस, बच और लेमन ग्रास जैसी औषधीय फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा। मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में धान की कटाई के बाद कम अवधि वाली दलहन, तिलहन और सब्जियों की खेती पर जोर रहेगा। वहीं ऊंची और बेहतर जल निकासी वाली जमीन पर औषधीय फसल, फलदार पौधे, सब्जियां तथा जैविक और प्राकृतिक खेती के क्लस्टर विकसित किए जाएंगे।
फसल विविधीकरण का सबसे बड़ा फोकस रबी सीजन पर है। इसके तहत 5,458.90 हेक्टेयर क्षेत्र में वैकल्पिक फसलों की खेती का लक्ष्य रखा गया है। चने को सबसे अधिक प्राथमिकता दी गई है और 3,244.10 हेक्टेयर में इसकी बोआई प्रस्तावित है। इसके साथ 662.80 हेक्टेयर में गेहूं, 472.50 हेक्टेयर में सरसों और 243.90 हेक्टेयर में मक्का लिया जाएगा। उड़द 214.80 हेक्टेयर, मूंग 178.70 हेक्टेयर, मूंगफली 142.20 हेक्टेयर और सूरजमुखी समेत अन्य फसलों के लिए 39 हेक्टेयर क्षेत्र प्रस्तावित है। अधिक मूल्य देने वाली औषधीय फसलों के लिए भी 110.60 हेक्टेयर का रकबा रखा गया है।
इस योजना में खेती के साथ पानी और मिट्टी को बचाने पर भी जोर दिया गया है। माइक्रो-वाटरशेड मॉडल के तहत धमतरी और मगरलोड विकासखंड में 36 नालों की सफाई, 19 फार्म पॉण्ड, 17 सोकपिट और 7 चेकडैम/एमआईटी सुधार के काम प्रस्तावित हैं। नदी किनारे के 75 गांवों में घास और पौधरोपण किया जाएगा, जिससे मिट्टी के कटाव को कम करने में मदद मिलेगी।
किसानों को नई फसलों और तकनीकों को समझाने के लिए धमतरी, कुरूद, मगरलोड और नगरी विकासखंड में फील्ड डेमो भी आयोजित किए जाएंगे। इन प्रदर्शनों के जरिए किसान अपनी जमीन की प्रकृति के अनुसार वैकल्पिक फसलों का चयन और उनकी खेती की तकनीक को व्यावहारिक रूप से समझ सकेंगे।
धमतरी में तैयार की गई यह पहल खेती को केवल उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय आय, जल संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन से जोड़ने की दिशा में कदम है। अलग-अलग परिस्थितियों वाली जमीन पर उपयुक्त फसलें अपनाने से किसानों के लिए आय के नए रास्ते खुलने और मौसम तथा एकल फसल पर निर्भरता से जुड़े जोखिम कम होने की उम्मीद है।
