बेमेतरा, 04 सितंबर 2026
बेमेतरा जिले में जल संरक्षण को लेकर किए गए लगातार प्रयासों का असर अब भू-जल की स्थिति में दिखाई देने लगा है। जिले के बेमेतरा, बेरला और नवागढ़ विकासखंड, जो पहले क्रिटिकल श्रेणी में थे, अब सेमी-क्रिटिकल जोन में पहुंच गए हैं। ‘मोर गांव, मोर पानी’ महाभियान के साथ मनरेगा और VB-G RAM G के तहत किए गए हजारों जल संरक्षण कार्यों, फसल चक्र में बदलाव और ग्रामीणों की भागीदारी को इस सुधार की अहम वजह माना जा रहा है।
कुछ वर्ष पहले प्रदेश के 146 विकासखंडों में सिर्फ पांच विकासखंड क्रिटिकल श्रेणी में थे, जिनमें तीन बेमेतरा जिले के थे। भू-जल स्तर में गिरावट के कारण गर्मियों में कुएं और दूसरे जलस्रोत सूखने लगते थे, जिससे पेयजल, सिंचाई और निस्तार की समस्या बढ़ जाती थी। इस स्थिति को बदलने के लिए जिले में जल संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए बड़े स्तर पर काम शुरू किया गया।
मनरेगा और VB-G RAM G के माध्यम से पिछले वर्षों में करीब 33,438 जल संरक्षण कार्य कराए गए। इनमें ट्रेंच निर्माण, तालाबों का गहरीकरण, नए तालाब, फार्म पॉन्ड, रिचार्ज पिट, अंडरग्राउंड डाइक, चेकडैम और रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग जैसे काम शामिल हैं। इसके अलावा ग्रामीणों की सीधी भागीदारी से करीब 46,762 अन्य जल संरक्षण कार्य भी किए गए।
जिले में जल संरक्षण की योजना केवल जरूरत के आधार पर नहीं, बल्कि स्थानीय जल प्रवाह और उपलब्धता को समझकर तैयार की गई। सभी ग्राम पंचायतों में जल बजट तैयार करने के लिए ग्रामीणों को प्रशिक्षण दिया गया। इसमें यह पता लगाया गया कि बारिश का पानी कहां गिरता है, कहां बहकर निकल जाता है और उसे किस स्थान पर रोका जा सकता है। इसी जानकारी के आधार पर GIS आधारित योजनाएं तैयार कर गांवों की जरूरत के अनुसार कामों का चयन किया गया।
भू-जल पर दबाव कम करने के लिए खेती के तरीके में भी बदलाव पर जोर दिया गया। रबी सीजन में ज्यादा पानी मांगने वाली धान की फसल के बजाय कम पानी में तैयार होने वाली फसलों को अपनाने के लिए किसानों को प्रेरित किया गया। कई ग्राम पंचायतों में ग्रामसभा के जरिए रबी सीजन में धान नहीं लेने को लेकर संकल्प और प्रस्ताव भी पारित किए गए। इससे भू-जल के अत्यधिक दोहन को कम करने में मदद मिली।
जल संरक्षण को सिर्फ सरकारी कार्यक्रम न बनाकर जनभागीदारी से जोड़ने के लिए जिलेभर में रैलियां, जल संचय की शपथ, वॉल राइटिंग और जागरूकता गतिविधियां आयोजित की गईं। घरों में बारिश का पानी जमीन में उतारने के लिए सोकपिट निर्माण को भी बढ़ावा दिया गया। इसके परिणामस्वरूप जिले में 37,821 सोकपिट बनाए गए। बिहान समूहों की महिलाओं, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने भी अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाई।
कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाईं ने कहा कि क्रिटिकल से सेमी-क्रिटिकल श्रेणी में आना अंतिम लक्ष्य नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। जिले का लक्ष्य भू-जल की स्थिति को और बेहतर करते हुए बेमेतरा को सेफ जोन में लाना है। उन्होंने कहा कि मनरेगा और VB-G RAM G केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि गांवों के प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
प्रशासन का कहना है कि जल संरक्षण के इन प्रयासों को आगे भी जारी रखा जाएगा, ताकि भू-जल स्तर में सुधार स्थायी रूप से बना रहे और आने वाले वर्षों में जिले को जल सुरक्षा की दिशा में और मजबूत किया जा सके।
