रायपुर, 2 सितंबर 2026
अंबिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत मेंड्राकला की हरमनिया देवी राजवाड़े के लिए एक लाख रुपये का ऋण सिर्फ आर्थिक मदद नहीं, बल्कि नई आजीविका की शुरुआत साबित हुआ है। आकांक्षा स्व-सहायता समूह को छत्तीसगढ़ महिला कोष से मिले ऋण से किराना और सिंगार सामग्री की दुकान शुरू की गई। कारोबार बढ़ने के साथ समूह की महिलाओं को नियमित आमदनी का जरिया मिला और परिवारों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होने लगी।
आकांक्षा स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष हरमनिया देवी बताती हैं कि समूह की महिलाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऐसी गतिविधि शुरू करने की थी, जिससे लगातार आय हो सके। समूह की बैठकों में चर्चा के बाद उन्हें छत्तीसगढ़ महिला कोष से ऋण की जानकारी मिली। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने योजना के बारे में बताया और आवेदन के लिए प्रोत्साहित किया। इसके बाद समूह ने जरूरी प्रक्रिया पूरी कर ऋण के लिए आवेदन किया।

आवेदन स्वीकृत होने के बाद समूह को एक लाख रुपये की ऋण राशि मिली। महिलाओं ने आपसी सहमति से इस राशि का इस्तेमाल किराना और सिंगार सामग्री की दुकान शुरू करने में किया। ग्रामीण क्षेत्र में रोजमर्रा की जरूरतों और सिंगार सामग्री की मांग को देखते हुए यह कारोबार धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा। ग्राहकों की संख्या बढ़ने के साथ दुकान में मांग के अनुसार नई सामग्री भी जोड़ी जा रही है।
हरमनिया देवी के मुताबिक, पहले समूह की महिलाओं के पास कोई स्थायी आजीविका गतिविधि नहीं थी। दुकान शुरू होने के बाद महिलाएं सामूहिक रूप से कारोबार संभाल रही हैं और अपनी मेहनत से आय अर्जित कर रही हैं। इससे उनमें आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ नेतृत्व और निर्णय लेने का आत्मविश्वास भी बढ़ा है।
दुकान से होने वाली अतिरिक्त आमदनी का असर अब परिवारों की रोजमर्रा की जिंदगी में भी दिखाई दे रहा है। बच्चों की पढ़ाई, शैक्षणिक सामग्री और घरेलू जरूरतों को पूरा करना पहले की तुलना में आसान हुआ है। महिलाएं परिवार की आर्थिक जरूरतों में भी पहले से अधिक योगदान दे पा रही हैं।
हरमनिया देवी का कहना है कि छत्तीसगढ़ महिला कोष से मिले ऋण ने समूह को केवल पूंजी उपलब्ध नहीं कराई, बल्कि अपना व्यवसाय शुरू करने का अवसर दिया। उनके अनुसार, एक लाख रुपये से शुरू हुई किराना और सिंगार की दुकान अब समूह की आजीविका का आधार बन रही है और महिलाओं को नियमित आय का अवसर दे रही है।
स्व-सहायता समूह के जरिए शुरू हुई यह छोटी सी दुकान ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार की संभावनाओं की मिसाल बन रही है। ऋण सहायता, सामूहिक निर्णय और स्थानीय जरूरत के मुताबिक कारोबार ने आकांक्षा समूह की महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत होने की दिशा में आगे बढ़ाया है।
