रायपुर, 2 सितंबर 2026
नारायणपुर के ग्रामीण इलाकों में पक्की छत का सपना अब हजारों परिवारों के लिए हकीकत बन चुका है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत जिले में 10 हजार 130 आवास स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से 4 हजार 770 आवास पूरे हो चुके हैं, जबकि 5 हजार 360 मकानों का निर्माण जारी है। योजना से जुड़े परिवारों के लिए यह सिर्फ मकान मिलने की बात नहीं, बल्कि सुरक्षित जीवन और बेहतर भविष्य की नई शुरुआत भी है।

लंबे समय तक कच्चे और जर्जर मकानों में रहने वाले ग्रामीण परिवारों को पक्का आवास मिलने से बारिश, गर्मी और अन्य मौसम की परेशानियों से राहत मिल रही है। घर की सुरक्षा के साथ परिवारों में स्थायित्व और आत्मविश्वास बढ़ा है। बच्चों के लिए भी सुरक्षित और बेहतर माहौल तैयार हो रहा है।

जिले में अब तक पूरे हो चुके 4 हजार 770 मकान उन परिवारों के लिए बड़ी उपलब्धि हैं, जो वर्षों से अपने पक्के घर का इंतजार कर रहे थे। नए घर में गृह प्रवेश उनके लिए केवल एक सरकारी योजना का लाभ हासिल करना नहीं, बल्कि जीवन में एक नए अध्याय की शुरुआत है। वहीं निर्माणाधीन 5 हजार 360 आवासों के पूरा होने के बाद आने वाले समय में हजारों और परिवारों को सुरक्षित आवास मिल सकेगा।
आवास निर्माण का असर गांवों की अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है। मकानों के निर्माण से स्थानीय राजमिस्त्रियों, मजदूरों और कारीगरों को काम मिल रहा है। निर्माण सामग्री से जुड़े स्थानीय कारोबारियों को भी इसका लाभ मिल रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को गति मिल रही है।
आवास निर्माण की गुणवत्ता और समयसीमा बनाए रखने के लिए जिला पंचायत नारायणपुर की ओर से लगातार निगरानी की जा रही है। ग्राम पंचायत से लेकर जनपद पंचायत स्तर तक निर्माण की प्रगति की समीक्षा की जा रही है। हितग्राहियों को निर्माण के अलग-अलग चरणों में तकनीकी मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया जा रहा है।

योजना में तकनीक आधारित निगरानी और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) जैसी व्यवस्थाओं के जरिए भुगतान और क्रियान्वयन में पारदर्शिता बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है। प्रशासन का लक्ष्य स्वीकृत आवासों को समय पर और निर्धारित गुणवत्ता के साथ पूरा कराना है।
नारायणपुर में 10 हजार 130 आवासों की स्वीकृति, 4 हजार 770 आवासों का पूर्ण होना और 5 हजार 360 आवासों का निर्माणाधीन होना इस योजना के बड़े पैमाने पर हो रहे क्रियान्वयन को दर्शाता है। इन पक्के घरों के साथ ग्रामीण परिवारों को सुरक्षित छत ही नहीं, बल्कि स्थिरता, सम्मान और बेहतर भविष्य की उम्मीद भी मिल रही है।
