स्टे ऑर्डर के बावजूद काम जारी रखने का ग्रामीणों का आरोप, स्कूल और नल-जल योजना के पास ट्रांसफार्मर लगाने से सुरक्षा पर उठे सवाल
सूरजपुर, 29 अगस्त 2026
सूरजपुर जिले के लटोरी गांव में ट्रांसफार्मर लगाने को लेकर ग्रामीणों और बिजली विभाग के बीच विवाद की स्थिति बन गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि बिजली विभाग द्वारा एक निजी आवास के सामने ट्रांसफार्मर और 11 केवी विद्युत लाइन लगाने की तैयारी की जा रही है, जबकि इसी स्थान पर पहले से सौर ऊर्जा आधारित नल-जल योजना संचालित है। ग्रामीणों का कहना है कि इस योजना से आसपास के परिवारों के साथ बड़ी संख्या में बच्चों को भी पानी की सुविधा मिलती है। ऐसे में विद्युत उपकरण लगाए जाने से लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बनी हुई है।
ग्रामीणों के मुताबिक प्रस्तावित स्थान चौराहे के पास है और इसके आसपास प्राथमिक विद्यालय तथा यात्री प्रतीक्षालय भी मौजूद हैं। इसके अलावा यहां कई ग्रामीण छोटे ठेले और दुकानें लगाकर अपनी रोजी-रोटी चलाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि दिनभर इस स्थान पर लोगों की आवाजाही रहती है। ऐसे व्यस्त स्थान पर ट्रांसफार्मर और 11 केवी लाइन लगाए जाने से किसी भी तरह की विद्युत दुर्घटना की स्थिति में बड़ा खतरा पैदा हो सकता है।

इस मामले में निजी आवास की ओर से आपत्ति जताए जाने के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से भी शिकायत की है। ग्रामीणों का दावा है कि ट्रांसफार्मर लगाए जाने के खिलाफ तहसील स्तर से स्टे ऑर्डर भी लिया गया है। इसके बावजूद बिजली विभाग द्वारा मौके पर काम आगे बढ़ाने का प्रयास किए जाने का आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि दिन के समय विरोध के कारण काम रोक दिया जाता है, जबकि रात के समय दोबारा काम शुरू करने की कोशिश की जाती है।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि जब ट्रांसफार्मर लगाने के लिए पहले ग्रामीण बैंक के सामने स्थान चिन्हित किया गया था, तो बाद में उसका स्थान बदलने की आवश्यकता क्यों पड़ी। ग्रामीणों का कहना है कि बैंक के पीछे खाली जमीन और बैंक के आसपास भी पर्याप्त स्थान उपलब्ध है। इसके अलावा खेल मैदान के किनारे भी ट्रांसफार्मर लगाने का विकल्प हो सकता है। ऐसे में निजी आवास के सामने और लोगों की नियमित आवाजाही वाले स्थान को ही क्यों चुना जा रहा है।

ग्रामीणों ने प्रशासन और बिजली विभाग से मांग की है कि मौके का तकनीकी निरीक्षण कराया जाए और ट्रांसफार्मर लगाने के लिए ऐसा स्थान निर्धारित किया जाए, जहां प्राथमिक विद्यालय, नल-जल योजना, यात्री प्रतीक्षालय और आम नागरिकों की सुरक्षा प्रभावित न हो। ग्रामीणों का कहना है कि उनका विरोध बिजली सुविधा के खिलाफ नहीं है, बल्कि वे सुरक्षित स्थान पर विद्युत व्यवस्था स्थापित किए जाने की मांग कर रहे हैं।
मामले को लेकर ग्रामीणों ने बिजली विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों द्वारा स्थान परिवर्तन के पीछे किसी तरह के दबाव या अनियमितता की आशंका भी व्यक्त की गई है, हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और यदि नियमों की अनदेखी हुई है तो जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि बिजली जैसी आवश्यक सुविधा लोगों तक पहुंचनी चाहिए, लेकिन इसके साथ सुरक्षा मानकों का पालन भी उतना ही जरूरी है। उनका कहना है कि यदि किसी वैकल्पिक स्थान पर ट्रांसफार्मर लगाया जा सकता है तो निजी मकान, स्कूल और सार्वजनिक स्थान के सामने विद्युत उपकरण स्थापित करने की जिद क्यों की जा रही है।
अब पूरे मामले में प्रशासन और बिजली विभाग के आधिकारिक निर्णय पर ग्रामीणों की नजर है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी आपत्तियों पर ध्यान नहीं दिया गया और विवादित स्थान पर ट्रांसफार्मर लगाने का काम जारी रखा गया, तो वे सामूहिक रूप से विरोध प्रदर्शन करेंगे।
लटोरी में उठता यह विवाद सिर्फ एक ट्रांसफार्मर के स्थान का मामला नहीं है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करता है कि विकास और बिजली सुविधा के साथ आम नागरिकों की सुरक्षा को कितनी प्राथमिकता दी जा रही है। ग्रामीणों की मांग है कि विद्युत व्यवस्था के लिए सुरक्षित और सर्वसम्मत स्थान का चयन किया जाए, ताकि सुविधा भी मिले और किसी तरह का जोखिम भी न रहे।
