रायपुर, 13 अगस्त 2026।
देश 80वें स्वतंत्रता दिवस की ओर बढ़ रहा है और इसी दौर में छत्तीसगढ़ का कृषि क्षेत्र भी बदलाव की नई तस्वीर पेश कर रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार खेती-किसानी को आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने पर जोर दे रही है। इसका असर किसानों तक खाद-बीज की उपलब्धता से लेकर सिंचाई, कृषि यंत्रीकरण और डिजिटल सेवाओं तक दिखाई दे रहा है।
94 फीसदी क्षेत्र में पूरी हो चुकी खरीफ की बोनी
खरीफ 2026 में प्रदेश में 48.69 लाख हेक्टेयर बोनी का लक्ष्य रखा गया है। 11 अगस्त तक 45.62 लाख हेक्टेयर यानी करीब 94 प्रतिशत क्षेत्र में बोनी पूरी हो चुकी है।
किसानों को अब तक 11.23 लाख मीट्रिक टन उर्वरक और 4.55 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरित किए जा चुके हैं। वहीं 15.55 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य के मुकाबले 15.83 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का भंडारण किया गया है।
नकली खाद पर सख्ती, 11 गुना बढ़ी कार्रवाई
कृषि विभाग ने नकली और अमानक उर्वरकों के खिलाफ कार्रवाई तेज की है। वर्ष 2025 में जहां 44 मामले सामने आए थे, वहीं 2026 में यह संख्या बढ़कर 493 मामलों तक पहुंच गई।
इस दौरान 107 जब्ती, 106 लाइसेंस निलंबन, 15 लाइसेंस निरस्तीकरण और 189 विक्रय प्रतिबंध की कार्रवाई की गई। वहीं पहली बार 11 एफआईआर भी दर्ज की गईं।
लाखों किसानों को सीधे मिला आर्थिक लाभ
कृषक उन्नति योजना के तहत खरीफ 2023 से खरीफ 2025 तक करीब 25.52 लाख किसानों को DBT के माध्यम से 35,892.90 करोड़ रुपये की सहायता दी गई।
वहीं प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 23वीं किस्त के तहत 24.63 लाख किसानों को 493 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मिली है। एग्रीस्टैक, ई-केवाईसी और डिजिटल सेवाओं के विस्तार से योजनाओं को ज्यादा पारदर्शी बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
कृषि में मशीन और आधुनिक सिंचाई का बढ़ता इस्तेमाल
कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के लिए अब तक 7,745 किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराए गए हैं और 568 फार्म मशीनरी बैंक स्थापित किए गए हैं।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत करीब 41,967 हेक्टेयर क्षेत्र में ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई का विस्तार किया गया है। वहीं 57 हजार से ज्यादा किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने का दावा किया गया है।
मछली पालन से लेकर उद्यानिकी तक बढ़ा दायरा
राज्य में उद्यानिकी फसलों का क्षेत्रफल बढ़कर 8.91 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है। हाईटेक नर्सरी, पैक हाउस और कोल्ड स्टोरेज जैसी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।
मत्स्य उत्पादन भी करीब 23 प्रतिशत बढ़कर 9.59 लाख टन तक पहुंच गया है। इससे छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख मत्स्य उत्पादक राज्यों में शामिल हुआ है।
ई-नाम से जुड़ीं 21 मंडियां
कृषि विपणन को डिजिटल बनाने की दिशा में प्रदेश की 21 मंडियां ई-नाम से जुड़ चुकी हैं। कृषि अवसंरचना निधि के तहत 1,900 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 3,026 करोड़ रुपये की उपलब्धि दर्ज की गई है।
कुल मिलाकर, खाद-बीज की उपलब्धता, नकली उर्वरकों पर कार्रवाई, DBT, डिजिटल सेवाएं, आधुनिक सिंचाई और कृषि यंत्रीकरण के जरिए छत्तीसगढ़ में खेती को ज्यादा पारदर्शी, तकनीक आधारित और किसान-केंद्रित बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
