नारायणपुर। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए आर्थिक और स्वास्थ्य सुरक्षा का मजबूत आधार बनकर उभरी है। खासकर अबूझमाड़ जैसे दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में इस योजना ने सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देने के साथ ही महिलाओं को आर्थिक संबल प्रदान किया है। योजना के तहत मिलने वाली सहायता राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेजी जा रही है।
अबूझमाड़ की माताओं के जीवन में आया सकारात्मक बदलाव
छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के सुदूर अबूझमाड़ क्षेत्र में कभी भौगोलिक कठिनाइयों और जागरूकता की कमी के कारण गर्भवती महिलाओं को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता था।
अब जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रयासों से प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना सुरक्षित मातृत्व की नई उम्मीद बनकर सामने आई है। विशेष रूप से नारायणपुर जिले के ओरछा विकासखंड में योजना का प्रभाव स्पष्ट दिखाई दे रहा है।
DBT के जरिए सीधे बैंक खाते में पहुंच रही आर्थिक सहायता
योजना के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता सीधे महिलाओं के बैंक खातों में DBT के माध्यम से जमा की जाती है।
इससे—
- गर्भावस्था के दौरान आय में होने वाले नुकसान की भरपाई हो रही है।
- महिलाओं को पौष्टिक भोजन, दूध और फल जैसी आवश्यक चीजें खरीदने में मदद मिल रही है।
- भुगतान प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी बनी है।
- ग्रामीण परिवारों का सरकारी योजनाओं पर भरोसा बढ़ा है।
पहली संतान पर 5 हजार, दूसरी बेटी के जन्म पर 6 हजार रुपये
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत—
- पहली जीवित संतान के जन्म पर 5,000 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है।
- यदि दूसरी संतान के रूप में बालिका का जन्म होता है, तो 6,000 रुपये की विशेष सहायता राशि प्रदान की जाती है।
यह पहल ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान को भी मजबूती दे रही है।
2025-26 में 1,192 महिलाओं को मिला योजना का लाभ
योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के चलते वित्तीय वर्ष 2025-26 में—
- जिले के 1,192 पात्र हितग्राहियों को योजना का लाभ मिला।
- इनमें ओरछा विकासखंड की 332 महिलाएं शामिल रहीं।
वहीं, वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक—
- 319 से अधिक महिलाओं को योजना का लाभ मिल चुका है।
- इनमें ओरछा की 81 महिलाएं शामिल हैं।
संस्थागत प्रसव और नियमित स्वास्थ्य जांच को मिला बढ़ावा
योजना के कारण ग्रामीण परिवारों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ी है।
अब—
- गर्भावस्था की शुरुआत में ही आंगनवाड़ी केंद्रों में पंजीयन कराया जा रहा है।
- गर्भवती महिलाओं की नियमित प्रसव पूर्व जांच (ANC) हो रही है।
- घर की बजाय अस्पतालों में संस्थागत प्रसव को प्राथमिकता दी जा रही है।
- नवजात शिशुओं का समय पर टीकाकरण सुनिश्चित किया जा रहा है।
सुरक्षित मातृत्व और कुपोषण मुक्त समाज की ओर बढ़ता नारायणपुर
जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग लगातार प्रयास कर रहे हैं कि जिले की प्रत्येक पात्र महिला तक योजना का लाभ पहुंचे।
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना न केवल आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रही है, बल्कि सुरक्षित मातृत्व, स्वस्थ शिशु और कुपोषण मुक्त समाज के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसके परिणामस्वरूप नारायणपुर की हजारों माताओं के जीवन में सुरक्षा, विश्वास और बेहतर भविष्य की नई उम्मीद जगी है।
