रायपुर। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत बस्तर जिले की खोटलापल ग्राम पंचायत में निर्मित डबरी (छोटे तालाब) ग्रामीणों के लिए आर्थिक समृद्धि का आधार बन रही है। इस जल संरचना से किसानों को वर्षभर सिंचाई की सुविधा मिल रही है, जिससे वे धान के साथ-साथ रबी फसल, मौसमी सब्जियों और मछली पालन के जरिए अपनी आय बढ़ा रहे हैं। इसके साथ ही भू-जल स्तर में सुधार और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित हुए हैं।
डबरी निर्माण से किसानों के जीवन में आया बड़ा बदलाव
पहले केवल मानसूनी बारिश पर निर्भर रहने वाले खोटलापल ग्राम पंचायत के किसान अब सालभर खेती करने में सक्षम हो रहे हैं।
मनरेगा और जल संवर्धन योजनाओं के तहत हितग्राही सोनधर और मोंगर के खेतों में बनाई गई डबरी ने—
- सिंचाई की समस्या को काफी हद तक दूर किया।
- भू-जल स्तर में सुधार किया।
- किसानों को बहुफसली खेती के लिए प्रोत्साहित किया।
- ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत की।
रबी फसल, सब्जी उत्पादन और मछली पालन से बढ़ेगी आय
हितग्राही सोनधर ने बताया कि डबरी में वर्षा जल संग्रहित होने से अब सिंचाई के लिए सालभर पानी उपलब्ध रहेगा।
इससे किसान—
- धान के साथ रबी फसलों की खेती कर सकेंगे।
- उन्नत साग-सब्जियों का उत्पादन बढ़ा सकेंगे।
- मछली पालन से अतिरिक्त आय अर्जित करेंगे।
- भविष्य में बतख पालन शुरू करने की भी योजना बना रहे हैं।
भू-जल स्तर में सुधार और जल संरक्षण को मिला बढ़ावा
डबरी निर्माण का लाभ केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि जल संरक्षण की दिशा में भी यह महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है।

इससे—
- आसपास के कुओं और हैंडपंपों का जलस्तर बेहतर होगा।
- खेतों में नमी बनी रहेगी।
- भू-जल पुनर्भरण (वाटर रिचार्जिंग) को बढ़ावा मिलेगा।
- सूखे की स्थिति में भी सिंचाई की सुविधा उपलब्ध रहेगी।
गांव में ही मिला रोजगार, पलायन पर लगी रोक
डबरी निर्माण कार्य के दौरान ग्राम पंचायत के कई स्थानीय जॉब कार्डधारी मजदूरों को गांव में ही रोजगार मिला।
इससे—
- ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध हुआ।
- मजदूरी के लिए दूसरे क्षेत्रों में पलायन की आवश्यकता कम हुई।
- मनरेगा के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली।
जल संरक्षण के साथ ग्रामीण समृद्धि की नई मिसाल
खोटलापल ग्राम पंचायत में मनरेगा के तहत निर्मित डबरी जल संरक्षण, कृषि विकास और ग्रामीण रोजगार का सफल उदाहरण बनकर सामने आई है। इस पहल से किसानों को सालभर सिंचाई की सुविधा मिल रही है, बहुफसली खेती और मत्स्य पालन को बढ़ावा मिला है तथा ग्रामीण परिवार आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
