रायपुर। बस्तर जिले के लोहंडीगुड़ा विकासखंड के सुदूर वनांचल स्थित ग्राम कार्लाकोंटा में वर्षों का इंतजार खत्म हो गया है। अब गांव के 43 परिवारों के घरों में पहली बार बिजली पहुंची है। करीब 99.19 लाख रुपये की लागत से एससीए (Special Central Assistance) योजना के तहत विद्युतीकरण कार्य पूरा किया गया है, जिससे ग्रामीणों के जीवन में विकास और उम्मीद की नई रोशनी आई है।
सघन वन क्षेत्र में पहली बार पहुंची बिजली
घने जंगलों से घिरे कार्लाकोंटा गांव के निवासी लंबे समय से बिजली जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित थे।
ग्रामीणों द्वारा जिला प्रशासन से मांग किए जाने के बाद गांव में विद्युतीकरण का कार्य शुरू किया गया। अब इस पहल से गरीबी रेखा वर्ग के 43 परिवारों को पहली बार बिजली की सुविधा मिल गई है।
करीब एक करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुई विद्युत अधोसंरचना
दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद विभाग ने गांव में विद्युत अधोसंरचना का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा किया।
परियोजना के तहत—
- 3 किलोमीटर 11 केवी विद्युत लाइन बिछाई गई।
- 4.9 किलोमीटर लो टेंशन (LT) लाइन स्थापित की गई।
- 25 केवी क्षमता के 4 ट्रांसफार्मर लगाए गए।
- परियोजना पर 99.19 लाख रुपये की लागत आई।
इस पूरी परियोजना का वित्तपोषण एससीए (Special Central Assistance) योजना के तहत किया गया।
बिजली से शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका को मिलेगा बढ़ावा
गांव में बिजली पहुंचने के बाद अब ग्रामीणों को कई सुविधाओं का लाभ मिलेगा।
इससे—
- घरों में रात के समय रोशनी उपलब्ध होगी।
- बच्चों को पढ़ाई के लिए बेहतर वातावरण मिलेगा।
- घरेलू कार्य आसान होंगे।
- भविष्य में स्वरोजगार और आजीविका के नए अवसर विकसित होंगे।
- स्वास्थ्य, शिक्षा और संचार सेवाओं तक पहुंच बेहतर होगी।
दूरस्थ वनांचल में विकास की नई शुरुआत
कार्लाकोंटा का विद्युतीकरण केवल एक आधारभूत सुविधा उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में विकास की नई शुरुआत का प्रतीक बनकर उभरा है।
यह परियोजना दर्शाती है कि शासन की विकास योजनाएं अब सुदूर वन क्षेत्रों तक प्रभावी ढंग से पहुंच रही हैं, जिससे अंतिम छोर पर बसे परिवारों के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आ रहा है।
