रायपुर, 28 जून 2026। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (जीपीएम) जिले में राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान का रविवार को जिला चिकित्सालय से शुभारंभ किया गया। कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने बच्चों को पोलियो की जीवनरक्षक दो बूंद दवा पिलाकर अभियान की शुरुआत की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पोलियो जैसी गंभीर बीमारी से बच्चों की सुरक्षा केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने जिले के सभी अभिभावकों से अपील की कि वे शून्य से पांच वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे को पोलियो की खुराक अवश्य दिलाएं, ताकि पोलियो मुक्त भारत का संकल्प और मजबूत हो सके। उन्होंने कहा कि “दो बूंद हर बार, पोलियो पर जीत बरकरार” केवल एक नारा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के स्वस्थ, सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य का संकल्प है।
कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रामेश्वर शर्मा, जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. के.के. सोनी, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ तथा बड़ी संख्या में स्वास्थ्य कर्मी उपस्थित रहे। अभियान के शुभारंभ के साथ ही जिले के सभी निर्धारित पोलियो बूथों पर बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने का कार्य शुरू हो गया। सुबह से ही बड़ी संख्या में अभिभावक अपने बच्चों को लेकर पोलियो बूथों पर पहुंचे और अभियान में उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई। स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने बूथों पर व्यवस्थित तरीके से बच्चों को जीवनरक्षक दवा पिलाई।
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मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रामेश्वर शर्मा ने बताया कि इस वर्ष जिले में 53 हजार 490 बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अभियान के पहले चरण में 28 जून को सभी पोलियो बूथों पर बच्चों को दवा पिलाई गई, जबकि दूसरे और तीसरे चरण में 29 एवं 30 जून को स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर उन बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाएंगी, जो किसी कारणवश बूथ तक नहीं पहुंच सके। इसके लिए जिलेभर में विशेष स्वास्थ्य दलों का गठन किया गया है, जिन्हें गांवों, मोहल्लों और दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचकर प्रत्येक बच्चे को पोलियो की दवा उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि अभियान को सफल बनाने के लिए व्यापक तैयारियां पहले ही पूरी कर ली गई थीं। स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को आवश्यक प्रशिक्षण दिया गया है तथा पोलियो वैक्सीन, परिवहन, कोल्ड चेन और अन्य व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों में भी विशेष टीमों की तैनाती की गई है, ताकि जिले का कोई भी बच्चा पोलियो की खुराक से वंचित न रह जाए। अभियान के दौरान प्रवासी परिवारों, ग्रामीण इलाकों और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों तक भी विशेष रूप से पहुंच बनाई जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग ने जिले के सभी अभिभावकों से अपील की है कि यदि स्वास्थ्य विभाग की टीम उनके घर पहुंचे तो पूरा सहयोग करें और यह सुनिश्चित करें कि परिवार के शून्य से पांच वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे को पोलियो की दो बूंद दवा अवश्य पिलाई जाए। विभाग ने स्पष्ट किया कि बच्चे को नियमित टीकाकरण हुआ हो या उसे हल्की सर्दी-खांसी जैसी सामान्य परेशानी हो, तब भी पोलियो की खुराक पूरी तरह सुरक्षित है और अवश्य दी जानी चाहिए।
राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान बच्चों को आजीवन विकलांगता से बचाने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण जनस्वास्थ्य अभियानों में से एक है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि जनसहभागिता, जागरूकता और समय पर पोलियो की खुराक दिलाने से ही पोलियो मुक्त समाज का लक्ष्य पूरी तरह हासिल किया जा सकता है। जीपीएम जिले में शुरू हुआ यह अभियान भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
