रायपुर | 28 जून 2026
राजधानी रायपुर के डीडीयू ऑडिटोरियम में आयोजित आपातकाल स्मृति दिवस के अवसर पर लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष पर आधारित स्मारिका “आपातकाल के योद्धा” का विमोचन किया तथा आपातकाल विषय पर आयोजित राज्य स्तरीय निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का ऐसा कालखंड है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। लोकतंत्र सेनानियों का संघर्ष, त्याग और बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन केवल इतिहास को याद करने के लिए नहीं, बल्कि युवाओं को लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान के महत्व से परिचित कराने के लिए भी आवश्यक हैं।
‘लोकतंत्र की रक्षा के लिए लोकतंत्र सेनानियों ने दिया अमूल्य योगदान’
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने संबोधन में कहा कि लोकतंत्र सेनानियों ने कठिन परिस्थितियों, जेल यातनाओं और अनेक चुनौतियों का सामना करते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा के लिए अभूतपूर्व योगदान दिया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता और लोकतंत्र हमें बड़ी कुर्बानियों के बाद मिले हैं, इसलिए इनके संरक्षण की जिम्मेदारी हर नागरिक की है।
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उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती संघर्ष, संस्कृति और लोकतांत्रिक परंपराओं की भूमि रही है। आने वाली पीढ़ी को इस इतिहास से अवगत कराने के लिए आपातकाल जैसे विषयों को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना एक सराहनीय पहल है।
परिवार से जुड़ी यादें भी साझा कीं
मुख्यमंत्री ने अपने पारिवारिक अनुभव साझा करते हुए कहा कि उनके बड़े पिताजी स्वर्गीय नरहरि साय आपातकाल के दौरान 19 महीनों तक जेल में रहे। उन्होंने कहा कि उस समय अनेक परिवारों को गंभीर आर्थिक और सामाजिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि जब परिवार के मुखिया जेल में होते थे, तब स्वयंसेवक भेष बदलकर लोकतंत्र सेनानियों के घरों तक राशन और आवश्यक सामग्री पहुंचाते थे, ताकि उनके परिवारों को कठिनाई का सामना न करना पड़े। उन्होंने उस दौर की कई स्मृतियों को साझा करते हुए सभी लोकतंत्र सेनानियों को श्रद्धापूर्वक नमन किया।
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‘लोकतंत्र जीवन मूल्य है’ — इंद्रेश कुमार
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता इंद्रेश कुमार ने कहा कि लोकतंत्र केवल शासन प्रणाली नहीं, बल्कि एक जीवन मूल्य है। उन्होंने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक था, जब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मौलिक अधिकार प्रभावित हुए।
उन्होंने लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष को याद करते हुए कहा कि इतिहास को याद रखना केवल अतीत को जानना नहीं, बल्कि उससे सीख लेकर बेहतर भविष्य का निर्माण करना है। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र प्रथम की भावना अपनाने, सामाजिक समरसता बढ़ाने, नशामुक्त समाज बनाने और भारतीय संस्कृति व मूल्यों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
डॉ. रमन सिंह बोले— लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति सजग रहने की सीख देता है आपातकाल
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि वर्ष 1975 का आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के लिए गंभीर चुनौती का समय था। उन्होंने प्रेस सेंसरशिप, मौलिक अधिकारों के निलंबन और संविधान संशोधनों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह दौर हमें लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति सदैव सजग रहने की प्रेरणा देता है।
निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं का हुआ सम्मान
कार्यक्रम में आपातकाल स्मृति दिवस के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया। प्रतियोगिता में प्रदेशभर से 540 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया।
विद्यालय स्तर पर “आपातकाल कभी विस्मृत न हो” विषय पर आयोजित प्रतियोगिता में जे.आर. दानी गर्ल्स स्कूल, रायपुर की जागृति जांगड़े ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। उन्हें ₹31 हजार की प्रोत्साहन राशि और स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया। विवेकानंद विद्यापीठ, कोरबा के सूरज तांडिया दूसरे तथा अग्रसेन इंटरनेशनल स्कूल, दुर्ग के अंश देशमुख तीसरे स्थान पर रहे।
महाविद्यालय स्तर पर “25 जून : संविधान हत्या दिवस” विषय पर आयोजित प्रतियोगिता में रायपुर की कल्याणी पटले प्रथम, रायगढ़ की सीमा साव द्वितीय और दुर्ग की खुशबू तृतीय स्थान पर रहीं। मुख्यमंत्री ने सभी विजेताओं को स्मृति चिन्ह और प्रोत्साहन राशि प्रदान करते हुए लोकतंत्र और संविधान के प्रति युवाओं की जागरूकता की सराहना की।
