रायपुर। खनिज संपदा से समृद्ध छत्तीसगढ़ में पिछले दो वर्षों के दौरान खनन क्षेत्र में व्यापक सुधारों का दौर देखने को मिला है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने खनन व्यवस्था में पारदर्शिता, तकनीकी निगरानी, राजस्व वृद्धि और स्थानीय समुदायों के हितों को केंद्र में रखते हुए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इन सुधारों का असर अब खनिज राजस्व, अवैध खनन पर नियंत्रण और खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास में दिखाई देने लगा है।
डिजिटल हुआ खनन प्रबंधन, ‘खनिज ऑनलाइन 2.0’ से बढ़ी पारदर्शिता
राज्य सरकार ने खनन संचालन को आधुनिक बनाने के लिए ‘खनिज ऑनलाइन 2.0’ प्रणाली लागू की है। इससे ई-रॉयल्टी पर्ची, ई-अभिवहन पारपत्र और राजस्व संग्रहण जैसी प्रक्रियाएं पूरी तरह ऑनलाइन हो गई हैं।
नई व्यवस्था के तहत खदान संचालक अब घर या खदान स्थल से ही 24 घंटे सेवाओं का लाभ ले सकते हैं। विभाग को भी खनन गतिविधियों की रियल टाइम मॉनिटरिंग की सुविधा मिली है, जिससे मानवीय हस्तक्षेप कम हुआ है और पारदर्शिता बढ़ी है।

डीएमएफ पोर्टल 2.0 से खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास पर फोकस
खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए संचालित जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) में भी सुधार किए गए हैं। ‘डीएमएफ पोर्टल 2.0’ के माध्यम से अब विकास कार्यों की स्वीकृति, निगरानी और वित्तीय प्रबंधन डिजिटल माध्यम से किया जा रहा है।
नई व्यवस्था में सामाजिक सर्वेक्षण, बेसलाइन अध्ययन, ग्रामीण सहभागिता और पंचवर्षीय विकास योजना को अनिवार्य बनाया गया है, ताकि खनन प्रभावित क्षेत्रों में वास्तविक जरूरतों के अनुरूप विकास कार्य हो सकें।
रेत खदानों की ई-नीलामी से व्यवस्था हुई पारदर्शी
राज्य सरकार ने रेत खदानों के संचालन में भी बड़ा बदलाव किया है। नई नीति के तहत रेत खदानों का आवंटन अब ई-टेंडर प्रक्रिया से किया जा रहा है। इसके तहत प्रदेश में लगभग 200 नई रेत खदानों की नीलामी हो चुकी है।
सरकार का कहना है कि इससे रेत की उपलब्धता बेहतर हुई है और उपभोक्ताओं को अधिक व्यवस्थित तथा नियंत्रित दरों पर रेत मिल रही है।

टिन संग्रह करने वाले आदिवासियों को मिला बड़ा लाभ
बस्तर संभाग में टिन खनिज संग्रहण से जुड़े आदिवासी परिवारों के हित में भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। राज्य सरकार ने टिन खरीद दर को लगभग चार गुना बढ़ाते हुए 640 रुपये प्रति किलो से बढ़ाकर 2800 से 2900 रुपये प्रति किलो तक कर दिया है।
साथ ही भुगतान प्रक्रिया को आधार आधारित डिजिटल प्रणाली से जोड़ने की तैयारी की गई है, जिससे राशि सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में पहुंचेगी और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
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16,757 करोड़ रुपये का खनिज राजस्व
खनन क्षेत्र में तकनीकी सुधार, निगरानी और व्यवस्थित संचालन का सीधा असर राज्य के राजस्व पर भी दिखाई दिया है। सरकार के अनुसार प्रदेश को खनिज क्षेत्र से 16,757 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है, जिसे सुधारों की सफलता का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
ड्रोन और ई-चेक गेट से अवैध खनन पर निगरानी
अवैध खनन और परिवहन पर नियंत्रण के लिए सरकार ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया है। पायलट प्रोजेक्ट के रूप में पांच ड्रोन और दस प्रमुख मार्गों पर ई-चेक गेट स्थापित करने की मंजूरी दी गई है।
ड्रोन के माध्यम से खदानों की निगरानी की जा रही है, जबकि ई-चेक गेट परिवहन गतिविधियों की डिजिटल जांच सुनिश्चित करेंगे।
अवैध खनन पर कड़े दंड का प्रावधान
गौण खनिज नियमों में संशोधन कर अवैध उत्खनन और परिवहन के मामलों में न्यूनतम 25 हजार रुपये जुर्माना तथा प्रति टन 2 हजार रुपये की वसूली का प्रावधान किया गया है।
इसके अलावा जब्त वाहनों की सुपुर्दगी के लिए 50 हजार रुपये से लेकर 3 लाख रुपये तक की जमानत राशि निर्धारित की गई है, जिससे अवैध गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
सैटेलाइट से हो रही खदानों की निगरानी
प्रदेश में स्वीकृत 1900 से अधिक गौण खनिज खदानों की निगरानी के लिए माइनिंग सर्विलांस सिस्टम लागू किया गया है। डोलोमाइट, क्वार्टजाइट और फायरक्ले जैसी खदानों पर सैटेलाइट आधारित निगरानी की जा रही है।
यदि स्वीकृत क्षेत्र के बाहर खनन होता है तो विभाग को तुरंत सूचना मिलती है और जांच के बाद कार्रवाई की जाती है।
29 हजार मामलों में कार्रवाई, 84 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली
ऑनलाइन अभिवहन पास और निगरानी व्यवस्था के चलते पिछले पांच वर्षों में अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण के 29 हजार से अधिक मामलों में कार्रवाई की गई है। इन मामलों में 84 करोड़ रुपये से अधिक का अर्थदंड वसूला गया है।
सुशासन और जनहित की दिशा में नया मॉडल
राज्य सरकार का दावा है कि खनन क्षेत्र में किए गए सुधार केवल राजस्व वृद्धि तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इन्हें तकनीक, पारदर्शिता, सामाजिक उत्तरदायित्व और जनभागीदारी से जोड़ा गया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म, ड्रोन निगरानी, सैटेलाइट मॉनिटरिंग और स्थानीय समुदायों के हितों को केंद्र में रखकर छत्तीसगढ़ खनन क्षेत्र में एक नए मॉडल की ओर बढ़ रहा है।
