रायपुर। गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले की ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार किया जा रहा जैविक विष्णुभोग चावल अब राज्यभर में अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिला स्व-सहायता समूहों को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी आजीविका गतिविधियों को बढ़ावा देने के प्रयासों के बीच जिले का प्रसिद्ध जैविक विष्णुभोग चावल राजधानी रायपुर पहुंचा, जहां जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री राजा उपेन्द्र बहादुर सिंह ने उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव को यह विशेष चावल भेंट किया।
यह जैविक विष्णुभोग चावल अरपा बिहान महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा तैयार किया गया है, जो पारंपरिक कृषि पद्धतियों और जैविक खेती के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार कर रही हैं।
महिला समूहों की मेहनत से मिली नई पहचान
उप मुख्यमंत्री को चावल भेंट करते हुए जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री राजा उपेन्द्र बहादुर सिंह ने जिले में महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा संचालित विभिन्न आजीविका गतिविधियों की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि स्थानीय स्तर पर पारंपरिक और विशिष्ट कृषि उत्पादों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विष्णुभोग धान का जैविक उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन किया जा रहा है। इस पहल ने ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार और आय के नए अवसर सृजित किए हैं।
जैविक खेती से बढ़ रही आय और आत्मनिर्भरता
महिला समूहों द्वारा तैयार किए जा रहे विष्णुभोग चावल की गुणवत्ता और शुद्धता ने इसे विशेष पहचान दिलाई है।
महिलाएं न केवल जैविक खेती कर रही हैं, बल्कि उत्पादों की पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन पर भी विशेष ध्यान दे रही हैं। इससे बाजार में इन उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है और समूहों की आय में भी निरंतर वृद्धि हो रही है।
इस पहल से ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनने का अवसर मिल रहा है और वे आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
स्थानीय कृषि परंपराओं को मिल रहा संरक्षण
विष्णुभोग धान छत्तीसगढ़ की पारंपरिक और विशिष्ट धान किस्मों में से एक माना जाता है। महिला समूहों द्वारा इसके जैविक उत्पादन से न केवल किसानों को लाभ मिल रहा है, बल्कि स्थानीय कृषि परंपराओं और जैविक खेती की संस्कृति को भी संरक्षण मिल रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे प्रयास स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के साथ-साथ कृषि विविधता को भी संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उप मुख्यमंत्री ने की महिला समूहों की सराहना
उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने महिला स्व-सहायता समूहों की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ग्रामीण महिलाओं के ऐसे प्रयास आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को मजबूत कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि महिला समूहों द्वारा तैयार किए जा रहे स्थानीय उत्पाद ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने के साथ-साथ प्रदेश की विशिष्ट कृषि पहचान को भी राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित कर रहे हैं।
श्री साव ने महिला समूहों और जिला प्रशासन को इस अभिनव कार्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ऐसे प्रयास ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर पैदा कर रहे हैं।
महिला सशक्तिकरण का बन रहा सफल मॉडल
गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले में महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा संचालित यह पहल महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण उद्यमिता और जैविक कृषि के सफल मॉडल के रूप में उभर रही है।
विष्णुभोग चावल के उत्पादन और विपणन के माध्यम से महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है और उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल रहा है। साथ ही जिले की विशिष्ट कृषि पहचान भी नई ऊंचाइयों तक पहुंच रही है।
