रायपुर। छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा क्षेत्र में ‘प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान’ (PM-USHA) के माध्यम से व्यापक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, उच्च शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता में सुधार, अनुसंधान को बढ़ावा देने और आधुनिक अधोसंरचना के विकास के लिए केंद्र सरकार द्वारा प्रदान की जा रही वित्तीय सहायता राज्य के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल रही है।
वर्ष 2014 से 2026 के बीच केंद्र सरकार द्वारा उच्च शिक्षा के क्षेत्र में दी गई विभिन्न स्वीकृतियों और योजनाओं में PM-USHA को सबसे महत्वपूर्ण पहलों में से एक माना जा रहा है। यह योजना पूर्व में संचालित राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (RUSA) का उन्नत और अधिक प्रभावी स्वरूप है, जिसका उद्देश्य देशभर में गुणवत्तापूर्ण और समावेशी उच्च शिक्षा को बढ़ावा देना है।
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उच्च शिक्षा के लिए मिला बड़ा वित्तीय संबल
PM-USHA योजना के तहत देशभर के लिए कुल 12,926.10 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इस राशि का महत्वपूर्ण हिस्सा छत्तीसगढ़ को भी प्राप्त हुआ है, जिससे राज्य के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में बड़े पैमाने पर विकास कार्य किए जा रहे हैं।
योजना के अंतर्गत चयनित शासकीय विश्वविद्यालयों को मल्टी-डिसिप्लिनरी एजुकेशन एंड रिसर्च यूनिवर्सिटीज़ (MERU) के रूप में विकसित करने के लिए प्रति संस्थान 20 करोड़ रुपये से लेकर 100 करोड़ रुपये तक का अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। वहीं चयनित शासकीय महाविद्यालयों को अधोसंरचना सुदृढ़ीकरण के लिए 5 करोड़ रुपये तक का प्रोजेक्ट आधारित अनुदान स्वीकृत किया जा रहा है।
इस योजना में वित्तीय भागीदारी केंद्र और राज्य सरकार के बीच 60:40 के अनुपात में तय की गई है, जिससे विकास कार्यों को गति मिल रही है।
स्मार्ट क्लासरूम और आधुनिक लैब से बदल रहा शिक्षण वातावरण
PM-USHA के तहत छत्तीसगढ़ में शिक्षा संस्थानों का आधुनिकीकरण तेजी से आगे बढ़ रहा है। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा केंद्र सरकार के साथ आवश्यक समझौता ज्ञापन (MoU) निष्पादित किया जा चुका है और विभिन्न संस्थान विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर पोर्टल पर अपलोड कर रहे हैं।
राज्य के अनेक महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में स्मार्ट क्लासरूम, अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं, डिजिटल शिक्षण सुविधाएं तथा कंप्यूटर सेंटर विकसित किए जा रहे हैं। इन सुविधाओं से विद्यार्थियों को तकनीक आधारित शिक्षा उपलब्ध होगी और उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में वृद्धि होगी।
बस्तर और सरगुजा जैसे दूरस्थ क्षेत्रों को मिल रही प्राथमिकता
योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका समावेशी स्वरूप है। PM-USHA का लाभ केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य के सभी 33 जिलों तक पहुंच रहा है।
विशेष रूप से आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों, वनांचलों और दूरस्थ अंचलों को प्राथमिकता दी गई है। बस्तर और सरगुजा संभाग के शासकीय महाविद्यालयों के साथ-साथ कम सकल नामांकन अनुपात (GER) वाले क्षेत्रों तथा आकांक्षी जिलों जैसे धमतरी, गरियाबंद और महासमुंद के संस्थानों को भी योजना में शामिल किया गया है।
इस पहल का उद्देश्य शिक्षा के क्षेत्रीय असंतुलन को दूर कर दूरस्थ क्षेत्रों के युवाओं को समान अवसर उपलब्ध कराना है।
पांच लाख से अधिक विद्यार्थियों को मिलेगा सीधा लाभ
PM-USHA योजना से राज्य के विभिन्न शासकीय शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत लगभग पांच लाख से अधिक छात्र-छात्राएं लाभान्वित हो रहे हैं।
योजना का विशेष लाभ ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों, अनुसूचित जनजाति (ST), अनुसूचित जाति (SC) तथा महिला विद्यार्थियों को मिल रहा है। आधुनिक शिक्षण संसाधनों की उपलब्धता से इन वर्गों के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अनुसंधान के बेहतर अवसर प्राप्त हो रहे हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लक्ष्यों को मिल रही मजबूती
विशेषज्ञों का मानना है कि PM-USHA राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लक्ष्यों को धरातल पर उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इससे उच्च शिक्षा संस्थानों की गुणवत्ता, शोध क्षमता और शैक्षणिक उत्कृष्टता में सुधार होगा।
आधुनिक अधोसंरचना, डिजिटल संसाधनों और अनुसंधान सुविधाओं के विस्तार से छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार किया जा सकेगा।
शिक्षा के क्षेत्र में नए युग की शुरुआत
PM-USHA योजना छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा को नई दिशा देने का कार्य कर रही है। वनांचलों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक आधुनिक शिक्षण सुविधाओं का विस्तार होने से राज्य के लाखों युवाओं के लिए अवसरों के नए द्वार खुल रहे हैं।
यह योजना केवल भवन निर्माण या संसाधन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य उच्च शिक्षा को अधिक गुणवत्तापूर्ण, समावेशी और भविष्य उन्मुख बनाना है, जिससे विकसित भारत के निर्माण में छत्तीसगढ़ की भूमिका और मजबूत हो सके।
