नारायणपुर। जिले के सुदूर वनांचल और अंतिम छोर पर बसे ग्राम पंचायत पीडियाकोट में आयोजित विशेष पेंशन भुगतान शिविर सुशासन और सामाजिक जागरूकता की मिसाल बनकर उभरा। जिला प्रशासन की पहल पर आयोजित इस शिविर में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के हितग्राहियों को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने के साथ-साथ नशामुक्त समाज का संदेश भी दिया गया।
ग्रामीणों, बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और महिलाओं की बड़ी भागीदारी वाले इस शिविर में प्रशासन ने पेंशन संबंधी समस्याओं का समाधान करने के साथ विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी दी।
नॉन-डीबीटी पेंशनधारियों को डीबीटी से जोड़ने की पहल
विशेष शिविर का मुख्य उद्देश्य सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्राप्त करने वाले ऐसे हितग्राहियों को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ना था, जो अभी तक नॉन-डीबीटी श्रेणी में शामिल थे।
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अधिकारियों और पंचायत कर्मियों ने पेंशनधारियों के आधार कार्ड, बैंक खाते और अन्य आवश्यक दस्तावेजों का संकलन किया। शिविर में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) प्रणाली की जानकारी देते हुए बताया गया कि इससे पेंशन की राशि सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से पहुंचेगी।
ई-केवाईसी कराने की दी गई सलाह
अधिकारियों ने ग्रामीणों को बैंक खातों को आधार से लिंक कराने और ई-केवाईसी प्रक्रिया पूर्ण करने की जानकारी दी।
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हितग्राहियों से अपील की गई कि वे अपनी निकटतम बैंक शाखा में जाकर जल्द से जल्द ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी करें, ताकि भविष्य में पेंशन भुगतान में किसी प्रकार की बाधा न आए और राशि सीधे उनके खाते में जमा हो सके।
मौके पर सुनी गईं समस्याएं, मिला समाधान
शिविर में पहुंचे पेंशनधारियों ने प्रशासन की इस पहल का स्वागत किया। दूरस्थ क्षेत्र होने के बावजूद बड़ी संख्या में ग्रामीण कार्यक्रम में शामिल हुए।
अधिकारियों ने दस्तावेजों का सत्यापन करने के साथ पेंशन से जुड़ी समस्याओं को भी सुना और कई मामलों का मौके पर ही समाधान किया। ग्रामीणों को शासन की अन्य योजनाओं की जानकारी देकर उनका लाभ लेने के लिए भी प्रेरित किया गया।
नशामुक्ति अभियान से जोड़ा गया शिविर
पेंशन भुगतान शिविर को केवल प्रशासनिक गतिविधि तक सीमित नहीं रखा गया। कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों और युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के बारे में विस्तार से बताया गया।
अधिकारियों ने समझाया कि नशा परिवार, स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति पर गंभीर प्रभाव डालता है। इसके बाद ग्रामीणों, युवाओं, पंचायत प्रतिनिधियों और पेंशनधारियों ने सामूहिक रूप से नशामुक्ति की शपथ ली।
स्वस्थ और जागरूक समाज की ओर कदम
कार्यक्रम के समापन पर ग्रामीणों ने संकल्प लिया कि वे स्वयं नशे से दूर रहेंगे और अपने गांव तथा समाज को भी नशामुक्त बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
प्रशासन का मानना है कि ऐसे शिविर न केवल सरकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में मदद करते हैं, बल्कि जागरूक, स्वस्थ और आत्मनिर्भर समाज के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
डिजिटल सशक्तिकरण की मिसाल बना पीडियाकोट
दूरस्थ वनांचल क्षेत्र में आयोजित यह शिविर प्रशासन की जनकल्याणकारी सोच और जमीनी स्तर पर सुशासन की पहुंच का उदाहरण बन गया है।
पीडियाकोट में हुआ यह आयोजन पेंशनधारियों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता और जनभागीदारी का भी प्रभावी माध्यम साबित हुआ।
