रायपुर।
प्रदेश में हाथियों के संरक्षण और वन्यजीव अपराधों की वैज्ञानिक जांच को सशक्त बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने महत्वपूर्ण पहल की है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री अरुण कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में रायगढ़ में दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का विषय “एशियाई हाथियों की मृत्यु जांच की आवश्यक प्रक्रियाएं” था। इसमें प्रदेश के विभिन्न वन क्षेत्रों से आए 78 वन अधिकारी एवं पशु चिकित्सा विशेषज्ञों ने भाग लिया। प्रशिक्षण का उद्देश्य हाथियों की मृत्यु के कारणों की वैज्ञानिक जांच, वन्यजीव अपराधों की पहचान तथा संरक्षण प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाना था।

छत्तीसगढ़ में वर्तमान में लगभग 450 हाथियों की उपस्थिति दर्ज की गई है। रायगढ़, जशपुर, कोरबा और सूरजपुर जैसे जिलों में हाथियों की बढ़ती आवाजाही और मानव-हाथी संघर्ष की चुनौतियों को देखते हुए यह प्रशिक्षण विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वन विभाग के अनुसार किसी हाथी की मृत्यु के पीछे बीमारी, विद्युत प्रवाह, विषप्रयोग, शिकार या अन्य कारणों की सटीक पहचान किए बिना भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम और दोषियों के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई संभव नहीं है। इसी उद्देश्य से अधिकारियों को आधुनिक जांच पद्धतियों का प्रशिक्षण दिया गया।
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प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने हाथियों की शारीरिक संरचना, स्वास्थ्य, व्यवहार और प्रबंधन से जुड़ी विस्तृत जानकारी साझा की। अधिकारियों को बताया गया कि किसी भी हाथी की मृत्यु की जांच केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं बल्कि वैज्ञानिक तथ्यों और साक्ष्यों पर आधारित विस्तृत अध्ययन है। जंगल में मिला मृत हाथी कई बार संभावित अपराध स्थल भी हो सकता है, इसलिए घटनास्थल की सुरक्षा और साक्ष्य संरक्षण बेहद महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम में वन्यजीव अपराधों की जांच, साक्ष्यों के संरक्षण, हाथी दांत तस्करी से जुड़े मामलों की कानूनी प्रक्रियाओं तथा न्यायालय में उपयोगी वैज्ञानिक प्रमाणों के संकलन पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया।दूसरे दिन अधिकारियों और पशु चिकित्सकों को फील्ड स्तर पर हाथियों के शव परीक्षण, नमूना संग्रहण, रक्त एवं ऊतक नमूनों के संरक्षण तथा विष विज्ञान और रोग परीक्षण से संबंधित व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
