मुंगेली ।
मुंगेली जिले के सरगांव थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत उमरिया में जमीन विवाद से जुड़ा एक मामला सामने आया है, जिसमें प्रशासनिक प्रक्रिया और नामांतरण कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत उमरिया बररीडीह निवासी अंजोरी (पिता दयालदास) ने वर्ष 1994-95 में लगभग 1 एकड़ कृषि भूमि ग्राम की रमाबाई (पति भुवनदास) को विक्रीनामा स्टांप के माध्यम से बेची थी। हालांकि उस समय भूमि का विधिवत रजिस्ट्री एवं नामांतरण नहीं हो पाया था।
बताया जाता है कि दोनों पक्षों के बीच लंबे समय तक सहमति और बातचीत के बावजूद रजिस्ट्री पूरी नहीं हो सकी। बाद में दोनों परिवारों के प्रमुख सदस्यों की मृत्यु हो गई, जिससे भूमि स्वामित्व को लेकर स्थिति और जटिल हो गई।
भूमि पर कब्जा और खेती का दावा ,प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल
भुवनदास के पुत्र और पौत्रों का कहना है कि वे लंबे समय से उक्त भूमि पर काबिज हैं और खेती भी कर रहे थे। इसी दौरान हाल ही में खेत से संबंधित एक घटना (धान की फसल चोरी का मामला) के बाद मामला खुला, जिसमें दावा किया गया कि कुछ लोगों द्वारा मजदूरी के आधार पर खेत में कार्य किया जा रहा था।

इस घटना के बाद भूमि स्वामित्व को लेकर नया विवाद सामने आया और दस्तावेजों की जांच शुरू हुई।मामले में सबसे बड़ा विवाद तब सामने आया जब अभिलाष (पौत्र पक्ष) द्वारा सरगांव तहसील कार्यालय में आवेदन कर दस्तावेजों के आधार पर मालिकाना हक की दावेदारी प्रस्तुत की गई।
परिजनों के अनुसार, पहले तहसीलदार Atul Singh द्वारा विपक्ष की अपील को खारिज कर दिया गया था, लेकिन बाद में उसी प्रकरण में कथित रूप से नामांतरण की प्रक्रिया कर दी गई।परिवार का आरोप है कि यह कार्रवाई बिना उचित नोटिस और स्पष्ट सुनवाई के की गई, जिससे प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
भुवनदास के परिवार का कहना है कि इस पूरे मामले में कोटवार, सरपंच और स्थानीय गवाहों के बयान और दस्तावेज मौजूद होने के बावजूद उन्हें सूचना दिए बिना नामांतरण कर दिया गया।
परिजनों ने इसे गंभीर अनियमितता बताते हुए प्रशासन से पुनः जांच की मांग की है।ग्रामीणों और प्रभावित परिवार ने मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि नामांतरण प्रक्रिया किस आधार पर और किन परिस्थितियों में की गई।
