रायपुर, 17 जुलाई 2026। किसानों को गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराने और नकली एवं अमानक उर्वरकों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए छत्तीसगढ़ कृषि विभाग ने रिकॉर्ड प्रवर्तन कार्रवाई करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर नई मिसाल कायम की है। कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम के नेतृत्व तथा कृषि उत्पादन आयुक्त श्री सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी के मार्गदर्शन में कृषि विभाग ने खरीफ सीजन के दौरान उर्वरक गुणवत्ता नियंत्रण के क्षेत्र में व्यापक अभियान चलाया, जिसके परिणामस्वरूप कार्रवाई के सभी प्रमुख मानकों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 के तहत की गई कार्रवाई में वर्ष 2025 की तुलना में कुल मामलों की संख्या 44 से बढ़कर 451 हो गई, यानी लगभग 10.25 गुना वृद्धि दर्ज की गई। विभाग की इस सख्त कार्रवाई से किसानों के हितों की सुरक्षा, कृषि आदानों की गुणवत्ता और पारदर्शी आपूर्ति व्यवस्था को नई मजबूती मिली है।
किसानों के हितों की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता
राज्य सरकार किसानों को प्रमाणित एवं गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराने को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। इसी उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा राज्यभर में उर्वरकों के भंडारण, विक्रय, वितरण और गुणवत्ता की लगातार निगरानी की जा रही है।
कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम के नेतृत्व में विभाग ने सघन निरीक्षण अभियान चलाकर नकली और अमानक उर्वरकों की बिक्री पर प्रभावी अंकुश लगाया है। इससे कृषि आदानों की पारदर्शी आपूर्ति व्यवस्था सुनिश्चित हुई है और किसानों को गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिली है।
रिकॉर्ड प्रवर्तन कार्रवाई से बना राष्ट्रीय मॉडल
कृषि उत्पादन आयुक्त श्री सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी के निर्देशन में विभाग ने खरीफ सीजन के दौरान प्रवर्तन कार्रवाई को नई गति दी। परिणामस्वरूप वर्ष 2025 की तुलना में कार्रवाई के मामलों में 10.25 गुना वृद्धि दर्ज की गई।
जहां पिछले वर्ष कुल 44 मामलों में कार्रवाई हुई थी, वहीं इस वर्ष यह संख्या बढ़कर 451 तक पहुंच गई। विभाग का मानना है कि यह उपलब्धि किसानों के हितों की रक्षा, कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
जब्ती, लाइसेंस निलंबन और एफआईआर में भी हुई उल्लेखनीय बढ़ोतरी
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार वर्ष 2026 में प्रवर्तन कार्रवाई के लगभग सभी क्षेत्रों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
पिछले वर्ष की तुलना में इस खरीफ सीजन में न्यायालय में प्रस्तुत प्रकरणों की संख्या 4 से बढ़कर 56, जब्ती की कार्रवाई 2 से बढ़कर 98, लाइसेंस निलंबन के मामले 3 से बढ़कर 97, लाइसेंस निरस्तीकरण 2 से बढ़कर 10 तथा विक्रय प्रतिबंध की कार्रवाई 33 से बढ़कर 183 हो गई।
इसके अलावा पहली बार 7 एफआईआर भी दर्ज कराई गईं, जो विभाग की कड़ी निगरानी और शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance) की नीति को स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं।
नियमित निरीक्षण और त्वरित कार्रवाई से बढ़ा किसानों का भरोसा
कृषि विभाग ने बताया कि राज्यभर में उर्वरकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण, नमूनों की जांच, शिकायतों का त्वरित निराकरण और दोषी विक्रेताओं के विरुद्ध कठोर कार्रवाई लगातार जारी है।
इन प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव किसानों के बीच देखने को मिल रहा है। गुणवत्तापूर्ण उर्वरकों की उपलब्धता बढ़ने और नकली उर्वरकों पर नियंत्रण के कारण किसानों का विभाग पर भरोसा पहले की तुलना में और अधिक मजबूत हुआ है।
गुणवत्तापूर्ण कृषि आदानों से बढ़ेगी उत्पादकता और किसानों की आय
कृषि विभाग का उद्देश्य केवल नियमों का पालन कराना या कार्रवाई करना नहीं है, बल्कि किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाले कृषि आदान उपलब्ध कराकर उनकी उत्पादकता और आय में वृद्धि सुनिश्चित करना भी है।
विभाग का मानना है कि प्रमाणित उर्वरकों के उपयोग से फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार होगा, जिससे किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ मिलेगा और प्रदेश की कृषि व्यवस्था अधिक मजबूत बनेगी।
पारदर्शी और जवाबदेह कृषि व्यवस्था की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़
उर्वरक गुणवत्ता नियंत्रण के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ द्वारा की गई रिकॉर्ड प्रवर्तन कार्रवाई राज्य सरकार की किसान हितैषी नीतियों और पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था का प्रभावी उदाहरण है। सख्त निगरानी, समयबद्ध कार्रवाई और गुणवत्तापूर्ण कृषि आदानों की उपलब्धता सुनिश्चित कर प्रदेश कृषि क्षेत्र में एक नई कार्यसंस्कृति विकसित कर रहा है।
कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम के नेतृत्व और कृषि उत्पादन आयुक्त श्री सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी के मार्गदर्शन में चलाया जा रहा यह अभियान न केवल किसानों के हितों की रक्षा कर रहा है, बल्कि छत्तीसगढ़ को उर्वरक गुणवत्ता नियंत्रण के क्षेत्र में देश के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में भी स्थापित कर रहा है।
