रायपुर, 03 सितम्बर 2026
बीजापुर के पीडिया गांव का 10 वर्षीय कमलेश ओयम अब पहले से ज्यादा आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की तैयारी में है। बचपन से चलने-फिरने में आ रही परेशानी के बीच चिरायु कार्यक्रम ने कमलेश को दाएं पैर का कृत्रिम अंग उपलब्ध कराया है। दंतेवाड़ा जिला अस्पताल में कृत्रिम पैर लगाने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसके लिए रोजमर्रा की जिंदगी और स्कूल तक पहुंच आसान होने की उम्मीद जगी है।
कमलेश वर्तमान में दंतेवाड़ा जिले के आवरगा स्थित सक्षम आवासीय विद्यालय में पढ़ाई कर रहा है। उसे पढ़ाई के साथ स्कूल की गतिविधियों में भी सक्रिय रहने की इच्छा है, लेकिन चलने में परेशानी उसके लिए लगातार चुनौती बनी हुई थी। स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान उसकी जरूरत सामने आने के बाद चिरायु कार्यक्रम के तहत आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर कृत्रिम पैर उपलब्ध कराया गया।
कृत्रिम अंग मिलने के बाद कमलेश के लिए स्कूल परिसर में आने-जाने और दैनिक गतिविधियों में भाग लेने के अवसर बढ़ेंगे। अपने साथियों के साथ सामान्य रूप से समय बिताने और पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने में भी उसे मदद मिलने की उम्मीद है।
कमलेश के परिवार के लिए यह सुविधा सिर्फ इलाज का हिस्सा नहीं, बल्कि बच्चे के भविष्य को लेकर एक नई उम्मीद है। परिवार को भरोसा है कि अब कमलेश अपनी पढ़ाई जारी रखते हुए अपनी रुचियों और सपनों को ज्यादा आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ा सकेगा।
चिरायु कार्यक्रम के तहत बच्चों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की शुरुआती पहचान कर उन्हें आवश्यक उपचार और सुविधाओं से जोड़ा जाता है। इसका उद्देश्य ऐसी स्वास्थ्य समस्याओं को समय रहते चिन्हित करना है, जो बच्चों के सामान्य जीवन, शिक्षा या विकास में बाधा बन सकती हैं।
कमलेश को मिला कृत्रिम पैर इसी प्रक्रिया का एक उदाहरण है, जहां स्वास्थ्य जांच के दौरान जरूरत की पहचान हुई और उसके बाद आवश्यक सुविधा उपलब्ध कराई गई। अब उसके लिए यह कृत्रिम अंग सिर्फ चलने का सहारा नहीं, बल्कि स्कूल, पढ़ाई और भविष्य की मंजिल की ओर बढ़ने का नया माध्यम बन रहा है।
