रायपुर, 03 सितंबर 2026
बाल विवाह, बाल श्रम, हिंसा, शोषण और साइबर अपराध जैसे खतरों से बच्चों को बचाने के लिए छत्तीसगढ़ में जागरूकता अभियान को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया जा रहा है। राज्य बाल संरक्षण समिति के निर्देशन में स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और सार्वजनिक स्थानों पर पहुंचकर बच्चों के साथ शिक्षकों, अभिभावकों और आम लोगों को बाल अधिकार, सुरक्षा कानून और संकट के समय मिलने वाली सहायता की जानकारी दी जा रही है।
रायपुर, बालोद और बेमेतरा की टीमों ने अलग-अलग स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में बच्चों और किशोर-किशोरियों को उनके अधिकारों के साथ सुरक्षित व्यवहार के बारे में बताया। जागरूकता गतिविधियों के दौरान किशोर न्याय अधिनियम, पॉक्सो अधिनियम, बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम और दत्तक ग्रहण विनियम सहित बाल संरक्षण से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई। मिशन वात्सल्य, मुख्यमंत्री बाल उदय योजना, बाल सक्षम नीति और बाल संरक्षण नीति जैसी सरकारी पहलों के बारे में भी बताया गया।

रायपुर में चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की टीम ने स्काउट गाइड, बालिकाओं के समूह, धूम्रपान करते पाए गए बच्चों और यात्रियों के बीच जागरूकता अभियान चलाया। इस दौरान बाल हिंसा, शोषण, मानव तस्करी, बाल श्रम और साइबर अपराध से जुड़े जोखिमों को समझाते हुए बच्चों और आम लोगों को सावधानी बरतने के तरीके बताए गए।
तिल्दा क्षेत्र में 13 अगस्त को शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खुड़मुड़ी और शासकीय हाई स्कूल छतौद में आयोजित कार्यक्रमों में 671 बच्चों और 16 शिक्षकों ने भाग लिया। विद्यार्थियों को बाल अधिकार, बाल हितैषी व्यवहार, पॉक्सो कानून, किशोर न्याय कानून, बाल विवाह की रोकथाम, साइबर अपराध और गुड टच-बैड टच जैसे विषयों की जानकारी दी गई। छतौद के आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक-3 का निरीक्षण कर वहां बच्चों, शिशुवती माताओं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका को भी विभागीय योजनाओं और चाइल्ड हेल्पलाइन की जानकारी दी गई।

बालोद जिले के कोंघाटोला स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में भी जिला बाल संरक्षण इकाई और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 ने जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें 113 बालक-बालिकाओं के साथ स्कूल के प्राचार्य और शिक्षक-शिक्षिकाएं शामिल हुए। बच्चों को पॉक्सो अधिनियम, किशोर न्याय अधिनियम, बाल विवाह प्रतिषेध कानून, गुड टच-बैड टच और साइबर अपराध से बचाव के उपाय बताए गए। संकट या शोषण की स्थिति में सहायता लेने की प्रक्रिया भी समझाई गई।
अभियान के दौरान बच्चों को यह संदेश दिया जा रहा है कि किसी भी तरह की हिंसा, शोषण या खतरे की स्थिति को छिपाने के बजाय भरोसेमंद व्यक्ति और संबंधित सहायता सेवा तक पहुंचना जरूरी है। चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के अलावा महिलाओं के लिए 181 और आपातकालीन पुलिस सहायता के लिए 112 नंबर की जानकारी भी दी जा रही है।
विभाग का कहना है कि बाल संरक्षण केवल सरकारी तंत्र की जिम्मेदारी नहीं है। बच्चों के आसपास रहने वाले परिवार, शिक्षक और आम नागरिक यदि उनके अधिकारों और सुरक्षा के प्रति सजग रहें, तो बाल विवाह, बाल श्रम, तस्करी, हिंसा और साइबर अपराध जैसे मामलों की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा सकती है।
