रायपुर, 03 सितंबर 2026
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्रामीण इलाकों में बारिश के पानी को खेतों से बहकर बर्बाद होने से रोकने की पहल अब किसानों की आय और खेती के तौर-तरीकों में बदलाव का आधार बन रही है। ‘विकसित भारत-जी राम जी’ योजना के तहत बनाए जा रहे डबरी अब जल संरक्षण के साथ ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने का जरिया बन रहे हैं। जिले में स्वीकृत 319 डबरियों में से 200 का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि 119 डबरियों का काम अंतिम चरण में है।
जिले में बिलाईगढ़ क्षेत्र में 132, बरमकेला में 103 और सारंगढ़ में 84 डबरियों को मंजूरी दी गई है। इन जल संरचनाओं के जरिए बारिश के पानी को स्थानीय स्तर पर रोकने और उसका उपयोग खेती के लिए करने की दिशा में काम किया जा रहा है। प्रशासन के अनुसार, पूर्ण और निर्माणाधीन डबरियों से करीब 25 करोड़ लीटर वर्षाजल के संचयन का लक्ष्य है।
इस पानी का सीधा लाभ करीब 300 एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई के रूप में मिलने की उम्मीद है। डबरियों में पानी रुकने से आसपास के भू-जल स्तर में भी सुधार हो रहा है। इसका असर कुओं और हैंडपंपों के जलस्तर पर भी दिखाई देने लगा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता को सहारा मिल रहा है।
सिंचाई सुविधा बढ़ने के साथ किसानों के लिए खेती के विकल्प भी बढ़ रहे हैं। पहले जहां कई किसान मुख्य रूप से खरीफ सीजन में धान की खेती तक सीमित रहते थे, वहीं अब डबरियों के पानी का उपयोग रबी और गर्मी के मौसम में सब्जियों तथा अन्य नकदी फसलों के लिए किया जा रहा है। इससे एक ही जमीन से साल में अलग-अलग मौसम में उत्पादन लेने की संभावनाएं बढ़ी हैं।
डबरी किसानों के लिए मछली पालन का अतिरिक्त साधन भी बन रही है। किसान संचित पानी का उपयोग मछली पालन में कर पूरक आय अर्जित कर रहे हैं। इस तरह जल संरक्षण की यह पहल खेती के साथ ग्रामीण परिवारों के लिए आय के दूसरे स्रोत को भी मजबूत कर रही है।
योजना का लाभ केवल जल और कृषि तक सीमित नहीं है। डबरी निर्माण के दौरान स्थानीय ग्रामीणों को अपने ही गांव और आसपास रोजगार के अवसर मिले हैं। वहीं निर्माण पूरा होने के बाद तैयार जल संरचनाएं किसानों के लिए लंबे समय तक उपयोगी परिसंपत्ति के रूप में काम करेंगी।
सारंगढ़-बिलाईगढ़ में डबरी निर्माण की यह पहल बारिश के पानी को संसाधन में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है। जल संचयन, सिंचाई, मछली पालन और रोजगार के जरिए यह मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ किसानों को अधिक आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
