रायपुर | 20 अगस्त 2026
छत्तीसगढ़ में मत्स्य पालन को नई ऊंचाई देने की तैयारी तेज हो गई है। केंद्र सरकार ने प्रदेश की मत्स्य क्षमता को देखते हुए इसे देश के प्रमुख मत्स्य हब के रूप में विकसित करने पर जोर दिया है। केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के सचिव श्री अविलक्ष्य लेखी ने कहा कि आधुनिक तकनीक, बेहतर अधोसंरचना और निर्यात को बढ़ावा देकर मत्स्य किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है।
रायपुर, धमतरी और कांकेर में विकसित होगा तिलापिया क्लस्टर
प्रदेश में तिलापिया उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए रायपुर, धमतरी और कांकेर जिलों में तिलापिया क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। इससे मछली पालन से जुड़े किसानों को आधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज और बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में काम होगा।
केंद्र और राज्य के सहयोग से तेज होगी मत्स्य क्रांति
केंद्रीय सचिव के अनुसार छत्तीसगढ़ में मत्स्य क्षेत्र की विभिन्न परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार द्वारा करीब 900 करोड़ रुपये की राशि व्यय एवं स्वीकृत की जा चुकी है। वहीं राज्य सरकार भी लगभग 300 करोड़ रुपये के सहयोग से मत्स्य क्षेत्र के विकास को गति दे रही है।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत पिछले छह वर्षों में छत्तीसगढ़ के लिए 956.86 करोड़ रुपये की परियोजनाएं स्वीकृत हुई हैं, जिसमें से 272.37 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच रही छत्तीसगढ़ की मछली
प्रदेश में उत्पादित मछलियों का निर्यात अब आयरलैंड और शिकागो सहित अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक हो रहा है। प्रदेश में 2 हजार से अधिक किसान तिलापिया पालन से जुड़े हैं। किसानों को वैश्विक बाजार से जोड़ने के लिए एक्सपोजर विजिट, नई हैचरियों और आधुनिक तकनीकों के विस्तार पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

मत्स्य बीज उत्पादन में देश में चौथे स्थान पर छत्तीसगढ़
राज्य में लगभग 2.08 लाख हेक्टेयर जलक्षेत्र में मत्स्य गतिविधियां संचालित हो रही हैं। प्रदेश में 9.59 लाख मीट्रिक टन मछली उत्पादन किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ मत्स्य बीज उत्पादन में देश में चौथे और मछली उत्पादन में छठे स्थान पर पहुंच चुका है।
प्रदेश में वर्तमान में 123 मत्स्य हैचरियां, 102 मत्स्य बीज उत्पादन फार्म, 2,021 पंजीकृत मत्स्य सहकारी समितियां और 1,662 स्व-सहायता समूह मत्स्य क्षेत्र से जुड़े हुए हैं।
आधुनिक तकनीक से बढ़ेगा उत्पादन
मत्स्य क्षेत्र में बायोफ्लॉक, आरएएस, केज कल्चर, तालाब निर्माण, लाइव फिश वेंडिंग सेंटर, कोल्ड स्टोरेज और फीड मिल जैसी आधुनिक सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। कोरबा के बांगो जलाशय में 37.10 करोड़ रुपये की लागत से एक्वा पार्क भी विकसित किया जा रहा है।
2026-27 में बड़े विस्तार की तैयारी
वर्ष 2026-27 के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 37,857 लाख रुपये की कार्ययोजना स्वीकृत की गई है। सरकार का फोकस मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के साथ किसानों की आय, गुणवत्तापूर्ण बीज, आधुनिक तकनीक, विपणन, मूल्य संवर्धन और निर्यात क्षमता को मजबूत करने पर है।
केंद्रीय सचिव श्री लेखी ने अधिकारियों से कहा कि पात्र मत्स्य किसानों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए बैंकों के साथ बेहतर समन्वय किया जाए, ताकि छोटे और मध्यम किसानों को वित्तीय सहायता प्राप्त करने में परेशानी न हो।
आधुनिक तकनीक, सरकारी निवेश और बढ़ते अंतरराष्ट्रीय बाजार के साथ छत्तीसगढ़ में मत्स्य पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आय बढ़ाने का एक बड़ा माध्यम बनता दिखाई दे रहा है।
